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हिंदी न्यूज़ NCRनोएडा-ग्रेटर नोएडा में घर खरीदार सबसे अधिक प्रभावित, 1.18 लाख करोड़ रुपये की 1.65 लाख यूनिट ठप

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में घर खरीदार सबसे अधिक प्रभावित, 1.18 लाख करोड़ रुपये की 1.65 लाख यूनिट ठप

एनरॉक ने अपने शोध में सात बड़े संपत्ति बाजारों - दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगरीय क्षेत्र, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में 2014 या उससे पहले शुरू की गई आवास परियोजनाओं को शामिल किया।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में घर खरीदार सबसे अधिक प्रभावित, 1.18 लाख करोड़ रुपये की 1.65 लाख यूनिट ठप
Praveen Sharmaनोएडा | भाषाSun, 26 Jun 2022 04:06 PM

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा की आवास परियोजनाओं में फ्लैट बुक करने वाले घर खरीदार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां 1.18 लाख करोड़ रुपये की 1.65 लाख से अधिक इकाइयां ठप पड़ी हैं। संपत्ति सलाहकार एनरॉक ने यह जानकारी दी है। 

एनरॉक ने अपने शोध में सात बड़े संपत्ति बाजारों - दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर), कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में 2014 या उससे पहले शुरू की गई आवास परियोजनाओं को शामिल किया। 

घर खरीदारों के शीर्ष निकाय फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (एफपीसीई) ने कहा कि प्रत्येक परियोजना में देरी के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए और समाधान किया जाना चाहिए। निकाय ने ग्राहकों को हो रही परेशानी पर चिंता जताई और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।

एनरॉक के आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2020 तक इन सात शहरों में 4,48,129 करोड़ रुपये की 4,79,940 इकाइयां ठप थीं या अत्यधिक देरी से चल रही थीं। इसमें से अकेले दिल्ली-एनसीआर की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जहां 1,81,410 करोड़ रुपये की 2,40,610 इकाइयां ठप हैं या देरी से चल रही हैं।

एनरॉक ने दिल्ली-एनसीआर के आंकड़ों का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि एनसीआर क्षेत्र में कुल ठप या विलंबित इकाइयों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि गुरुग्राम का हिस्सा केवल 13 प्रतिशत है। 

एनारॉक के वरिष्ठ निदेशक और अनुसंधान प्रमुख प्रशांत ठाकुर ने कहा कि परियोजना में देरी पिछले एक दशक में भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र का अभिशाप रहा है, विशेष रूप से एनसीआर में। यहां तक ​​​​कि आरईआरए (रियल्टी कानून) के कार्यान्वयन का भी इस पर थोड़ा प्रभाव पड़ा है। अन्य कारकों के अलावा, उन्होंने कहा कि तरलता की कमी ने एनसीआर में कई डेवलपर्स के लिए बाधाओं को जन्म दिया।

 

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