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900 साल पुरानी कब्र पर DDA ने चलाया बुलडोजर, इतिहासकारों ने महरौली एक्शन पर क्यों उठाए सवाल

डीडीए ने महरौली के घने रिजर्व जंगल संजय वन के अंदर स्थित 900 साल पुरानी कब्र को जमींदोज कर दिया है। इसपर इतिहासकारों और एक्टिविस्ट्स ने सवाल उठाए हैं। बाबा हाजी को पहले सूफी संत में से एक माना जाता है

900 साल पुरानी कब्र पर DDA ने चलाया बुलडोजर, इतिहासकारों ने महरौली एक्शन पर क्यों उठाए सवाल
Sneha Baluniहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीTue, 06 Feb 2024 08:40 AM
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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 30 जनवरी को बाबा हाजी रोजबीह की कब्र को जमींदोज कर दिया। उन्हें दिल्ली के पहले सूफी संतों में से एक माना जाता है। यह कब्र महरौली के घने रिजर्व जंगल संजय वन के अंदर स्थित थी। डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एचटी को बताया कि संजय वन के अंदर कई धार्मिक स्ट्रक्टर, जो दक्षिणी रिज का एक हिस्सा हैं को ध्वस्त कर दिया गया, जिसमें 12वीं शताब्दी की यह कब्र भी शामिल है। इतिहासकारों और एक्टिविस्ट्स ने 900 साल से मौजूद इस कब्र पर डीडीए द्वारा लिए गए एक्शन पर सवाल उठाए हैं।

डीडीए के एक अधिकारी ने कहा, 'रिज प्रबंधन बोर्ड के अनुसार, रिज क्षेत्र सभी प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त होना चाहिए और इसलिए एक समिति का गठन किया गया, जिसने संजय वन के अंदर कई अवैध स्ट्रक्चर को हटाने का सुझाव दिया।' नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तब हुई जब दक्षिणी रिज के 314 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया है। इन अतिक्रमणों में कई बहुमंजिला इमारतें और विशाल फार्महाउस शामिल हैं, जिनमें से कई रिज के घने जंगलों में फैले हुए हैं।

कई अदालती आदेशों और टिप्पणियों के बावजूद, अधिकारियों ने उन्हें हटाने के लिए कुछ नहीं किया है। उदाहरण के तौर पर, पिछले साल दिसंबर में, दिल्ली हाईकोर्ट ने रिज से अतिक्रमण हटाने में 'पैर पीछे खींचने' के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की थी। लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और इसे लेकर दिए तर्क पर इतिहासकारों और एक्टिविस्ट्स ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने 900 साल पहले से मौजूद एक इमारत के कथित 'अतिक्रमण' पर सवाल किए। उन्होंने हैरानी जताई की एजेंसियां वन क्षेत्र के नए अतिक्रमण पर एक्शन लेने की बजाय पुराने स्मारकों को निशाना बना रही हैं।

बाबा हाजी रोजबीह की कब्र, जो किला लाल कोट के प्रवेश द्वार पर थी, का उल्लेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहायक अधीक्षक मौलवी जफर हसन द्वारा 1922 में प्रकाशित 'मुहम्मदन और हिंदू स्मारकों की सूची, खंड III- महरौली जिला' में मिलता है। सूची के अनुसार: 'बाबा हाजी को दिल्ली के सबसे पुराने संतों में से एक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वह राय पिथुरा के समय में आए थे और किले की खाई के पास एक गुफा में अपना निवास स्थान बनाया था।'

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