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तेजी से घट रहा हिंडन का जलस्तर, राहत शिविरों से घर लौटने लगे लोग; जिला प्रशासन ने इन्हें दी अनुमति

हिंडन में जलस्तर घटने के साथ ही लोगों ने राहत शिविर छोड़ने शुरू कर दिए हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक बीते 24 घंटे में करीब 25 प्रतिशत लोग राहत शिविरों को छोड़कर अपने घर चले गए।

तेजी से घट रहा हिंडन का जलस्तर, राहत शिविरों से घर लौटने लगे लोग; जिला प्रशासन ने इन्हें दी अनुमति
Sneha Baluniकार्यालय संवाददाता,ग्रेटर नोएडाSat, 29 Jul 2023 10:37 AM
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हिंडन में जलस्तर घटने के साथ ही लोगों ने राहत शिविर छोड़ने शुरू कर दिए हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक बीते 24 घंटे में करीब 25 प्रतिशत लोग राहत शिविरों को छोड़कर अपने घर चले गए। प्रशासन ने सिर्फ उन्हीं लोगों को वापस जाने की अनुमति दी। जहां पानी बहुत कम हो गया है। वहीं, लगभग तीन हजार से अधिक लोग अब भी राहत शिविरों में रहकर गुजर -बसर कर रहे हैं।

हिंडन में तेजी से जलस्तर घट रहा हैं। गुरुवार को जहां हिंडन में साढ़े 12 हजार क्यूसेक पानी था। शुक्रवार को पानी की उपलब्धता 2848 क्यूसेक हो गई। नदी में जलस्तर 199.05 मीटर मापा गया, जोकि पिछले कई दिनों से 201 मीटर से अधिक था। जलस्तर घटने के साथ ही डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों के चेहरे भी खिल गए हैं। जिन लोगों के मकान ऊंचाइयों पर बने हैं, उन्होंने राहत शिविर छोड़कर अपने घर जाना शुरू कर दिया है।

घनश्याम छिजारसी के डूब क्षेत्र में रहता हैं। उसने यहां प्लॉट खरीदकर घर बनाया था। उसके मकान के बाहर तक पानी आ गया, जिसके बाद वह राहत शिविर में आ गया। शुक्रवार को पानी कम होने के बाद वह घर लौट गए। पानी उनके मकान में अंदर तक घुस था, जिससे कई सामान बह गया।

यमुना में भी स्थिति सुधर रही

इसके अलावा कई अन्य लोग ऐसे भी है, जिनके घर अभी भी ढाई फीट तक पानी में डूबे हुए हैं। यदि हिंडन में सहारनपुर से पानी नहीं छोड़ा जाता है तो अगले दो दिनों में यहां का पानी कम होने की उम्मीद है। वहीं, यमुना के जलस्तर में भी घटाव जारी है। शुक्रवार को ओखला बैराज पर 65026 क्यूसेक पानी बह रहा था, जो गुरुवार की तुलना में मामूली कम हुआ है। यमुना में जलस्तर 198.55 मीटर है। राहत की बात यह है कि दोनों ही नदियों में अब जलस्तर खतरे के लाल निशान से काफी नीचे पहुंच गया है।

3691 लोग हुए थे विस्थापित

हिंडन और यमुना में जलस्तर बढ़ने के बाद यहां डूब क्षेत्र में रहने वाले करीब 3771 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें से 3691 को विस्थापित किया गया था। दोनों नदियों का पानी 18 गांवों में घुसा था। वहीं, यमुना क्षेत्र में रहने वाले कामगार भी अपने अपने फॉर्म हाउस लौट रहे हैं।

घरों की दीवारें कमजोर होने की आशंका

कई दिनों तक पानी में डूबे रहने के कारण घरों की नींव हल्की पड़ने की आशंका बनी है। लोगों के अनुसार पानी उनकी दीवारों पर चढ़ गया था, जिसे सूखने में काफी समय लग सकता है। उन्हें मकान के गिरने का भी डर सता रहा है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ के बाद घरों की मजबूती जांचने की बात कही है।

एसडीएम सदर अंकित कुमार ने कहा, 'करीब 20 से 25 प्रतिशत लोगों ने राहत शिविर छोड़े हैं। अभी भी तीन हजार के करीब लोग शिविरों में हैं, जिन्हें प्रशासन की ओर से खाना व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही।'

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