ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCR'फरार नहीं वो तो पुलिस चौकी पर पानी सप्लाई कर रहा था', वकील की दलील पर MCOCA के आरोपी को मिली बेल

'फरार नहीं वो तो पुलिस चौकी पर पानी सप्लाई कर रहा था', वकील की दलील पर MCOCA के आरोपी को मिली बेल

सुनवाई के दौरान दिल्ली स्थित तीस हजारी कोर्ट के जज ने कहा, 'मैं यह मानने के लिए बाध्य हूं कि सौरभ भार्गव को MCOCA के तहत दोषी नहीं करार देने का उचित आधार है।' कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।

'फरार नहीं वो तो पुलिस चौकी पर पानी सप्लाई कर रहा था', वकील की दलील पर MCOCA के आरोपी को मिली बेल
Nishant Nandanएएनआई,नई दिल्लीTue, 18 Jun 2024 07:11 PM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली की एक अदालत ने  Maharashtra Control of Organised Crime Act (MCOCA) के तहत आरोपी बनाए गए एक शख्स को जमानत दे दी है। इस शख्स पर आरोप है कि वो संगठित क्राइम सिंडिकेट का सदस्य है। पुलिस ने यह भी बताया था कि अपनी गिरफ्तारी से पहले वो फरार था। आरोपी शख्स के वकील ने अदालत को बताया कि जब उसे फरार बताया गया था तब उस अवधि में वो रेगुलर तौर पर हरी नगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी में पानी सप्लाई किया करता था। 

इस केस में तथ्यों और स्थिति को परखने के बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के स्पेशल जज शिवाली शर्मा ने सौरभ भार्गव उर्फ भिंडा को जमानत दी है। आरोप है कि वो सलमान त्यागी गैंग का सदस्य है जो क्राइम सिंडिकेट चलाता है। यह केस हरी नगर पुलिस स्टेशन का है। 13 अगस्त, 2019 को सलमान त्यागी और उसके 22 सहयोगियों के खिलाफ हरि नगर थाने में केस दर्ज किया गया था। भिंडा पर भी केस दर्ज हुआ था। दिल्ली पुलिस ने 24 अप्रैल, 2024 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर किया था। 

भिंडा को 23 दिसंबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था। भिंडा ने सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत मांगी थी। सभी मामलों को रिकॉर्ड पर लेने के बाद स्पेशल जज ने आरोपी को जमानत दे दी। जज ने कहा, 'मैं यह मानने के लिए बाध्य हूं कि सौरभ भार्गव को MCOCA के तहत दोषी नहीं करार देने का उचित आधार है।' 24 मई को अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में यह भी सामने आया है कि साल 2018 के बाद आरोपी किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं था।

फरार नहीं चौकी पर पानी सप्लाई करता था

बचाव पक्ष के वकील दीपक शर्मा ने दलील पेश करते हुए कहा कि जांच अधिकार ने बिना किसी सबूत के आरोपी पर गलत केस दर्ज कर दिया कि वो किसी क्राइम सिंडिकेट का सदस्य है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने कभी भी उसे जांच में शामिल होने के लिए नहीं बुलाया। दीपक शर्मा ने आगे दलील दी कि, 'यहां तक कि जिस अवधि में उसे फरार बताया जा रहा था वो हरी नगर चौकी में रेगुलर पानी सप्लाई किया करता थ। लिहाजा वो हरी नगर थाने में तैनात कर्मियों की जानकारी में ही दिल्ली में मौजूद था। इस दौरान जांच में शामिल होने के लिए उसे कभी नहीं कहा गया। इतना ही नहीं उसे कभी कोई नोटिस भी नहीं दिया गया।'

APP ने क्या दी दलील..

हालांकि, अदालत में Additional Public Prosecutor (APP) ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर प्रकृति के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि MCOCA के तहत जो एफआईआर दर्ज है उसमें आरोपी का नाम दर्ज है। एपीपी ने कहा कि आरोपी कई केसों में शामिल रहा है और उसने फाइनेंसरों, प्रॉपर्टी डीलरों और बुकीज को धमकी दे कर उनसे पैसे भी ऐंठे हैं।
 

 

Advertisement