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हिंदी न्यूज़ NCRहरियाणा : डेथ सर्टिफिकेट में देरी पर रोहतक PGI के पूर्व डायरेक्टर से जवाब तलब, 5 डॉक्टरों के खिलाफ भी नोटिस जारी

हरियाणा : डेथ सर्टिफिकेट में देरी पर रोहतक PGI के पूर्व डायरेक्टर से जवाब तलब, 5 डॉक्टरों के खिलाफ भी नोटिस जारी

चंडीगढ़। वार्ता Praveen Sharma
Tue, 26 Oct 2021 05:14 PM
हरियाणा : डेथ सर्टिफिकेट में देरी पर रोहतक PGI के पूर्व डायरेक्टर से जवाब तलब, 5 डॉक्टरों के खिलाफ भी नोटिस जारी

मृत्यु प्रमाणपत्र देर से जारी करने के मामले में गलतबयानी को लेकर हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने रोहतक पीजीआई के पूर्व निदेशक डॉ. रोहतास यादव से जवाब मांगा है और इस मामले में संस्थान के ही पांच डॉक्टरों के खिलाफ स्वत: संज्ञान नोटिस जारी करने का भी निर्णय लिया है।

आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने बताया कि आयोग ने फाइलों को लंबित रखने के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार जिन डॉक्टरों के खिलाफ स्वत: संज्ञान नोटिस जारी किया है, उनमें डॉक्टर अजय, अंजलि, पेमा, साक्षी और अमरनाथ शामिल हैं।

इसके अलावा, मृत्यु के 125 लंबित मामलों के बारे में यह जानकारी भी मांगी है कि वे उपायुक्त कार्यालय या सिविल सर्जन कार्यालय को किस तारीख को भेजे गए थे। साथ ही, उपायुक्त और सिविल सर्जन को भी इस बात की पुष्टि करने को कहा गया है कि क्या ये मामले उनके कार्यालयों में प्राप्त हुए और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

मीनाक्षी राज के अनुसार, 24 अक्टूबर को संस्थान के निदेशक से प्राप्त एक जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि 125 मामलों में से 86 मामलों में अभी तक मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किए गए हैं। यह पीजीआई के पूर्व निदेशक डॉ. रोहतास यादव के 11 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष दिए गए बयान के एकदम विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संस्थान में मृत्यु का ऐसा कोई मामला लंबित नहीं है, जिसके संबंध में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया जाना हो।

उन्होंने बताया कि तथ्यों को सत्यापित करने के लिए, पीजीआईएमएस, रोहतक की वर्तमान निदेशक डॉ. गीता के साथ टेलीफोन पर बात की गई। उन्होंने 24 अक्टूबर को भेजी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मृत्यु से संबंधित जिन 125 फाइलों के पंजीकरण में देरी हुई, उनमें से 107 फाइलें कोविड-19 अवधि की हैं, जब इस महामारी के कारण असामान्य परिस्थितियां थीं। परिणामस्वरूप, प्रणाली चरमरा गई थी। इसके अलावा, गैर-कोविड अवधि के 18 मामलों में से ज्यादातर 2019 के हैं, जिनमें देरी हर स्तर पर व्यवस्थित जांच की विफलता के कारण है। हालांकि, यह तर्क दिया गया है कि अब दुरुस्त है। 

मीनाक्षी ने बताया कि दिनांक 24 अक्टूबर के इस पत्र के साथ संलग्न 5 डॉक्टरों द्वारा हस्ताक्षरित जांच रिपोर्ट धोखा देने के अलावा और कुछ नहीं है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2019 में हुई मृत्यु के मामलों में दो साल के बाद भी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया, जबकि अब कोविड महामारी न के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह माना जा सकता है कि कोविड महामारी के कारण व्यवस्था चरमरा गई थी और इस दौरान मृत्यु प्रमाणपत्र समय पर जारी नहीं किए जा सके, लेकिन 2019 के 17 मामलों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इन 17 मामलों में से 6 मामलों में भी आयोग के हस्तक्षेप के बाद गत 10 सितंबर को 2 साल से भी अधिक समय के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया है, लेकिन शेष 11 मामलों में मृत्यु प्रमाणपत्र आज तक जारी नहीं किया गया है। जुलाई, 2019 में हुई मृत्यु के 3 मामलों में आज तक भी मृत्यु प्रमाण पत्र आज भी जारी नहीं किया गया है। इनके बारे में केवल यह उल्लेख किया गया है कि मामला उपायुक्त कार्यालय या सिविल सर्जन कार्यालय को भेजा गया है, लेकिन निदेशक इन कार्यालयों में से किसी को भी मामला भेजे जाने की तारीखें बताने में विफल रहे हैं। 

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