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Hindi News NCRगुरुग्राम में सड़क का जमीन विवाद खत्म होने पर NH 248A से जुड़ जाएंगे ये 4 सेक्टर, हजारों लोगों को होगा फायदा

गुरुग्राम में सड़क का जमीन विवाद खत्म होने पर NH 248A से जुड़ जाएंगे ये 4 सेक्टर, हजारों लोगों को होगा फायदा

दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम जिले के सेक्टर 68-69 की मुख्य सड़क जमीन अधिग्रहण विवाद में फंसी हुई है। इस विवाद के दूर होने के बाद सेक्टर 68, 69, 70 और 70ए एनएच 248ए से सीधा जुड़ जाएंगे।

गुरुग्राम में सड़क का जमीन विवाद खत्म होने पर NH 248A से जुड़ जाएंगे ये 4 सेक्टर, हजारों लोगों को होगा फायदा
Praveen Sharmaगुरुग्राम। हिन्दुस्तानTue, 07 May 2024 02:46 PM
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दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम जिले के सेक्टर 68-69 की मुख्य सड़क जमीन अधिग्रहण विवाद में फंसी हुई है। इस विवाद के दूर होने के बाद सेक्टर 68, 69, 70 और 70ए गुरुग्राम-सोहना हाईवे (एनएच 248ए) से सीधा जुड़ जाएंगे। इससे यहां रहने वाले हजारों लोगों को सीधा फायदा होगा।

हाईवे से जुड़ने से इन सेक्टरों में विकसित रिहायशी कॉलोनियों और सोसाइटियों के लोगों को लाभ पहुंचेगा। साथ ही साथ एसपीआर पर वाहनों का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इस मुख्य सड़क के निर्माण को लेकर पुलिस उपायुक्त यातायात विरेंद्र विज ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.श्रीनिवास को पत्र लिखा है।

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने इस मुख्य सड़क के निर्माण के लिए गांव बादशाहपुर में साल 2013 में जमीन अधिग्रहण के पुराने अधिनियम के नोटिस दिए थे। जमीन मालिक ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके नए अधिनियम के तहत मुआवजा राशि देने की मांग कर दी। हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया। दूसरी तरफ, नए जमीन अधिग्रहण अधिनियम के तहत एचएसवीपी ने जमीन मालिकों को मुआवजा वितरित कर दिया।

एचएसवीपी, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चला गया। वहीं, कुछ जमीन मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका में अपील की गई कि उन्हें विस्थापित नीति का लाभ दिया जाए। मकान के बदले में एचएसवीपी का प्लॉट दिलवाया जाए। फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भेज दिया। मामले की दोबारा सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता राजेश यादव ने कहा कि इस सड़क के निर्माण के बीच में 16 मकान आ रहे हैं। हरियाणा सरकार इस सड़क निर्माण विवाद को सुलझाना नहीं चाह रही है। अगर विवाद सुलझाना होता तो छह साल से वैकल्पिक प्लॉट की मांग कर रहे ग्रामीणों की मांग को पूरा कर दिया जाता। उन्हें द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर वैकल्पिक प्लॉट दिए जाने चाहिए।