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Hindi News NCR2 हजार में फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बेचकर कर रहे थे जान से खिलवाड़, कोर्ट के निर्देश पर मामला दर्ज 

2 हजार में फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बेचकर कर रहे थे जान से खिलवाड़, कोर्ट के निर्देश पर मामला दर्ज 

कोरोना महामारी के दौरान फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुग्राम पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

2 हजार में फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बेचकर कर रहे थे जान से खिलवाड़, कोर्ट के निर्देश पर मामला दर्ज 
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,गुरुग्रामSun, 16 Jun 2024 10:52 AM
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कोरोना महामारी के दौरान फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुग्राम पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया है। गुरुग्राम पुलिस ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान एक प्रमुख कंपनी की पैथोलॉजी लैब के नाम का उपयोग कर फर्जी आरटी-पीसीआर परीक्षण रिपोर्ट बनाने के आरोप में अज्ञात व्यक्तियों पर शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि मामला सुशांत लोक थाने में दर्ज किया गया है, क्योंकि कंपनी का मुख्यालय इसी इलाके में है। पुलिस ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि महामारी के दौरान 2 हजार रुपये में  आरटी-पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट बेची गई जो एक नामी कंपनी के लेटरहेड पर मुद्रित की गई थी। यह भी आरोप लगाया कि 8 जून और 23 जून 2021 को शिकायत दर्ज करने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। ऐसे में उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट ने मामले की जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार का निर्देश दिया है।

सुशांत लोक थाने के एसएचओ मनोज कुमार ने कहा कि कंपनी को पता चला कि रिपोर्ट एक डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद जारी की जा रही थी, जो दो महीने ही पहले लैब छोड़ चुका था। जालसाजों ने इन रिपोर्टों के लिए लोगों से 2-2 हजार रुपये लिए। ऐसा कर उन्होंने लोगों की जान को जोखिम में डाला। कंपनी की ओर से अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई थी।

कंपनी का आरोप है कि इस मामले में न केवल धोखाधड़ी और जालसाजी शामिल है बल्कि लाभ के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डाला गया।  दिल्ली-एनसीआर में कंपनी एनएबीएल मान्यता प्राप्त पैथोलॉजी लैब कोविड आरटी-पीसीआर परीक्षण करने के लिए अधिकृत है। हाल ही में हमें पता चला कि अज्ञात व्यक्ति हमारे नाम पर नकली कोविड आरटी-पीसीआर रिपोर्ट जारी कर रहे थे। उनके नाम पर जारी की गई कई कोविड रिपोर्टें वास्तव में कंपनी द्वारा तैयार ही नहीं की गईं।

कंपनी ने बताया कि इन रिपोर्टों पर फोटोशॉप के जरिए उस डॉक्टर के हस्ताक्षर किए गए जो दो महीने पहले ही कंपनी छोड़ चुका था। 19 जून 2021 को कंपनी को एक ईमेल में तीन पीडीएफ फाइल में कोविड रिपोर्ट को सत्यापित करने के लिए कहा गया। जांच करने पर कंपनी ने पाया कि ये रिपोर्टें उनके द्वारा कभी जारी ही नहीं की गईं। कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसने धोखाधड़ी से जुड़े एक नाम का पता लगाया। हालांकि उस व्यक्ति की मृत्यु कोविड से हुई थी। इसके बाद कंपनी ने अदालत में याचिका दायर की, जिसने मामले का संज्ञान लिया और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

एसएचओ ने कहा कि वे जांच कर रहे हैं और अभी तक संदिग्धों की पहचान नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच और संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल किए गए प्रमाणपत्रों की जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया है। नोएडा निवासी वकील प्रशांत रावत, जो इस मामले में व्हिसिल ब्लोअर हैं, ने कहा कि उन्होंने साक्ष्य एकत्र किए हैं और कंपनी को यह सत्यापित करने के लिए लिखा है कि क्या रिपोर्ट वास्तविक हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि महामारी के दौरान आरटी-पीसीआर परीक्षण की एक नकारात्मक रिपोर्ट 2 हजार रुपये में बेची गई और रिपोर्ट कंपनी के लेटरहेड पर मुद्रित की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 8 जून और 23 जून 2021 को शिकायत दर्ज करने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिससे उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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