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बीमा की रकम हड़पने को आगरा में भिखारी को जिंदा जलाने वाला गुजरात से दबोचा, 17 साल बाद खुला हत्या का राज

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने बताया कि पारसौल गांव के मूल निवासी अनिल मलिक ने तीन जुलाई 2006 में आगरा में एक भिखारी को खाना खिलाने का लालच देकर कार में बैठाने के बाद बेहोश कर कार में आग लगा दी थी।

बीमा की रकम हड़पने को आगरा में भिखारी को जिंदा जलाने वाला गुजरात से दबोचा, 17 साल बाद खुला हत्या का राज
Praveen Sharmaग्रेटर नोएडा। हिन्दुस्तानSat, 11 Nov 2023 07:10 AM
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ग्रेटर नोएडा में दनकौर के करीब पारसौल गांव निवासी युवक ने खुद को मृत घोषित करने के लिए 17 साल पहले आगरा में विक्षिप्त भिखारी को बेहोश कर कार में जिंदा जला दिया। उसने परिजनों से शव की शिनाख्त कराकर बीमा की एक करोड़ से ज्यादा रकम हड़प ली और अहमदाबाद शिफ्ट हो गया। अहमदाबाद पुलिस ने तीन दिन पहले उसे गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया। अहमदाबाद पुलिस शुक्रवार को उसे लेकर दनकौर के किसान इंटर कॉलेज पहुंची और रिकॉर्ड खंगाले।

दनकौर पहुंची अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने बताया कि पारसौल गांव के मूल निवासी अनिल मलिक ने तीन जुलाई 2006 में आगरा में एक विक्षिप्त भिखारी को खाना खिलाने का लालच देकर कार में बैठा लिया। उसने खाने में नशे की गोलियां मिला दी थीं। इससे भिखारी बेहोश हो गया। उसके बाद उसने कार में आग लगा दी। कार में जले व्यक्ति की शिनाख्त परिजनों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत अनिल मलिक के रूप में की थी।

पुलिस का दावा है कि अनिल ने इस काम में अपने पिता भाई और दोस्तों का भी साथ लिया। इसके बाद रिकॉर्ड में स्वयं को मृत दर्शाकर आरोपी ने अपने नाम बीमा पॉलिसी और कार बीमा के एक करोड़ पांच लाख रुपये हड़प लिए। अनिल मलिक गुजरात के अहमदाबाद में रह रहा था। घटना के 17 साल बाद पुलिस को चेकिंग के दौरान उसकी हरकतों पर शक हुआ और छानबीन में मामले का खुलासा हुआ। अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अनिल को तीन दिन पहले अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था।

पैतृक गांव में भिखारी का अंतिम संस्कार किया था

पुलिस ने बताया कि मलिक परिवार ने दो सहयोगियों महिपाल गदरिया और राकेश खटिक के साथ आगरा टोल बूथ के पास एक भिखारी को देखा और उसे अपने टारगेट के लिए चुना। कार में भिखारी के शव को जिंदा जलाने के बाद परिजनों ने शव की पहचान अनिल के रूप में की। इसके बाद भिखारी के शव का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया था।

गुजरात में कागजात भी बनवा लिए

अहमदाबाद पुलिस के अनुसार, अनिल मलिक ने अपना नाम चौधरी राजकुमार रख लिया था। राजकुमार के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक में खाता भी खोल लिया था। उसने यहां ऑटोरिक्शा चालक के रूप में आजीविका शुरू की। अनिल के पिता विजयपाल सिंह और भाई गाजियाबाद में रहते हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि अनिल का अपने परिजनों भाइयों और दोस्तों से बराबर संपर्क था। पुलिस के अनुसार, इस षड्यंत्र में परिजनों का भी हाथ है।

पारसौल में आठवीं तक पढ़ाई की थी

अहमदाबाद पुलिस शुक्रवार को अनिल मलिक को लेकर पारसौल के इंटर कॉलेज में पहुंची। अनिल ने आठवीं तक की पढ़ाई पारसौल के किसान इंटर कॉलेज में की थी। रिकॉर्ड में उसका नाम अनिल मलिक ही पाया गया, जबकि उसने अपना फर्जी नाम राजकुमार रख लिया था। पुलिस उन लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है, जिन्होंने इस षड्यंत्र में अनिल का साथ दिया था। इंटर कॉलेज में रिकॉर्ड की पुष्टि करने और आवश्यक प्रमाण पत्र ले जाने के बाद अहमदाबाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई। पुलिस उसे न्यायालय में हाजिर कर जेल भेजेगी।

पिता और भाई भी आरोपी

बीमा की राशि हड़पने के मामले में अनिल मलिक के पिता विजयपाल मालिक और भाई अभय मालिक भी आरोपी हैं। जालसाजी के मुकदमे में दोनों के नाम हैं। पिता विजयपाल मलिक गाजियाबाद में ट्रांसपोर्टर हैं। पहले वह डीटीसी में नौकरी करते थे। नौकरी से रिटायरमेंट के बाद पिता ने गाजियाबाद में ट्रांसपोर्ट कंपनी बना ली और विजय ट्रस्ट नाम से एक संस्था भी चला रहे हैं।

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