DA Image
27 जनवरी, 2021|9:01|IST

अगली स्टोरी

सरकार ने दिया कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक टालने का प्रस्ताव, किसानों ने विचार के लिए वक्त मांगा

farmers protest  ht photo

नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी घमासान के बीच बुधवार को हुई 10वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा ही रही। हालांकि, आज केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों पर गतिरोध समाप्त करने के लिए इन्हें डेढ़ साल तक के लिए टालने के साथ ही किसान संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा है। किसान नेताओं ने अभी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और कहा कि वे आपसी चर्चा के बाद सरकार के समक्ष अपनी राय रखेंगे। 

सरकार और लगभग 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 10वें दौर की वार्ता के बाद किसान नेताओं ने कहा कि अगली बैठक 22 जनवरी को तय की गई है। गुरुवार को किसान संगठन अपनी आंतरिक बैठक करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक के लिए निलंबित रखने का प्रस्ताव रखा। हमने इसे खारिज कर दिया, लेकिन यह प्रस्ताव चूंकि सरकार की तरफ से आया है, हम कल इस पर आपस में चर्चा करेंगे और फिर अपनी राय बताएंगे। वहीं, एक अन्य किसान नेता कविता कुरूगंती ने कहा कि सरकार ने तीनों कानूनों को आपसी सहमति से निर्धारित समय तक निलंबित करने और कमेटी गठित करने के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा देने का प्रस्ताव भी रखा।

एमएसपी को कानूनी गारंटी देने पर चर्चा टाल रही सरकार  

किसान नेताओं ने कहा कि वे तीनों कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर कायम हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और अपनी राय से अगली बैठक में वे सरकार को अवगत कराएंगे। केंद्र सरकार ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से 10वें दौर की वार्ता में तीनों कृषि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन प्रदर्शनकारी किसान इन कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। किसानों ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने पर चर्चा टाल रही है।

आज की बैठक में भी निकला कोई नतीजा

किसान नेताओं ने कहा कि 10वें दौर की वार्ता के पहले सत्र में कोई समाधान नहीं निकला क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने रुख पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि आज की वार्ता में 11वें दौर की वार्ता की तारीख तय करने के अलावा कोई नतीजा नहीं निकलना है। ज्ञात हो कि कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक पहले ही रोक लगा रखी है। कोर्ट ने भी एक कमेटी गठित की है।

बैठक के दौरान किसान नेताओं ने कुछ किसानों को एनआईए की ओर से जारी नोटिस का मामला भी उठाया और आरोप लगाया कि किसानों को आंदोलन का समर्थन करने के लिए प्रताड़ित करने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है। सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस मामले को देखेंगे।

अगले सत्र में हम एमएसपी पर चर्चा के लिए जोर डालेंगे

भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है और मुझे नहीं लगता है कि आज की बैठक में कोई नतीजा निकलेगा। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पहले तीनों कृषि कानूनों पर चर्चा चाहती है और एमएसपी के मुद्दे पर बाद में चर्चा चाहती है। उन्होंने कहा कि अगले सत्र में हम एमएसपी पर चर्चा के लिए जोर डालेंगे और वार्ता की अगली तारीख 26 जनवरी से पहले तय करने को कहेंगे। पहले सत्र में तकरीबन एक घंटे की चर्चा के बाद दोनों पक्षों ने ब्रेक लिया।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आज की बैठक में कोई समाधान नहीं निकला। हम अगली तारीख को फिर मिलेंगे। टिकैत ने कहा कि किसान संगठन के नेताओं ने किसानों को एनआईए की नोटिस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ संशोधनों का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें तीनों कानूनों को निरस्त करने से कम पर कुछ मंजूर नहीं है।

एनआईए के नोटिस से जुड़े मुद्दे से शुरू हुई बैठक

किसान नेता कविता कुरूगंती ने कहा कि बैठक एनआईए नोटिस से जुड़े मुद्दे से शुरू हुई। इसके बाद किसान संगठनों की ओर से कानूनों को निरस्त करने की मांग उठाई गई। उन्होंने कहा कि किसान नेताओं ने बताया कि सरकार की ओर से कृषि मंत्री ने संसद में दिए जवाबों में कृषि को राज्य का विषय बताया है और यहां तक कि कृषि बाजार को भी राज्य का विषय बताया गया है। इससे पहले दोपहर पौने तीन बजे तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले लगभग 50 दिन से जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयासों के तहत सरकार और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू हुई।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश लगभग 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ यहां विज्ञान भवन में वार्ता में शामिल हुए। दसवें दौर की वार्ता 19 जनवरी को होनी थी, लेकिन यह स्थगित कर दी गई थी। केंद्र सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की वार्ता में मुद्दे को सुलझाने की कोशिश बेनतीजा रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले बनाई थी कमेटी

सरकार ने पिछली वार्ता में किसान संगठनों से अनौपचारिक समूह बनाकर अपनी मांगों के बारे में सरकार को एक मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि, किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। सरकार और किसान संगठनों के मध्य चल रही वार्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को गतिरोध समाप्त करने के मकसद से चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए। इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस कमेटी से अलग कर लिया। 

सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों पर गतिरोध खत्म करने के लिए बनाई की गई कमेटी के सदस्यों पर कुछ किसान संगठनों द्वारा आक्षेप लगाए जाने को लेकर बुधवार को नाराजगी जाहिर की। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उसने कमेटी को फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं दिया है, यह शिकायतें सुनेगी तथा सिर्फ रिपोर्ट देगी।

ट्रैक्टर परेड रोकने का आदेश देने से कोर्ट का इनकार 

इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदर्शनकारी किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड को रोकने के लिए एक न्यायिक आदेश पाने की दिल्ली पुलिस की उम्मीदों पर पानी फिर गया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को (इस संबंध में दायर) याचिका वापस लेने का निर्देश देते हुए कहा कि यह पुलिस का विषय है और ऐसा मुद्दा नहीं है कि जिस पर कोर्ट को आदेश जारी करना पड़े। 

उल्लेखनीय है कि हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब दो महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि इन कानूनों से मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की प्रणाली समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों की कृपा पर रहना पड़ेगा। हालांकि, सरकार इन आशंकाओं को खारिज कर चुकी है। 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Govt s 10th round of talks with protesting farmers ends Next meeting on Jan 22