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कम से कम हमें पानी और टेंट तो दो, दिल्ली में बुलडोजर के कहर से बेघर हुए लोगों की सरकार से गुहार

अपने घर से बेघर हुई डिंपल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं और और मैं यहां 15 सालों से हूं। सरकार ने क्यों हमारी झोपड़ियों को ढहाने से पहले हमारे बारे में नहीं सोचा?

कम से कम हमें पानी और टेंट तो दो, दिल्ली में बुलडोजर के कहर से बेघर हुए लोगों की सरकार से गुहार
Nishant Nandanपीटीआई,नई दिल्लीWed, 29 Nov 2023 09:04 PM
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दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हुमायूँ का मकबरा इलाके के आसपास जिन झुग्गी-झोपड़ियों को ढहाया गया है अब उन झोपड़ियों में रहने वाले लोगों ने सरकार से गुहार लगाई है कि कम से कम उन्हें टेंट औऱ पानी तो मुहैया कराया जाए। सुंदर नर्सरी और दिल्ली पब्लिक स्कूल के बीच झोपड़ियों में करीब 1,000 से 1,500 लोग रहते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग कचरा चुनने, स्ट्रीट हॉकर्स, नौकरानी, श्रमिक और छोटे स्तर के व्यापारी हैं। पिछले सप्ताह अदालत के आदेश के बाद स्लम एरिया में रहने वाले लोगों को घरों को ढहा दिया गया था। ज्यादातर बेघर हुए लोगों का आरोप है कि उन्हें दो दिनों के अंदर घर खाली करने के लिए कहा गया था और सरकार ने इन्हें घर देने का कोई ऑफर भी नहीं दिया था। 

अपने मकान से बेघर होने वाले एक शख्स ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, 'करीब एक हफ्ता हो गया है और हम सचमुच में सड़कों पर रहते हैं। क्या सरकार हमें कम से कम पानी और टेंट तक उपलब्ध नहीं करा सकती है? डिंपल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं और और मैं यहां 15 सालों से हूं। सरकार ने क्यों हमारी झोपड़ियों को ढहाने से पहले हमारे बारे में नहीं सोचा? हमें यहां तक कि रहने के लिए एक जगह भी नहीं मिला।'

20 बुलडोजर लेकर आए और फिर...

21 नवंबर की सुबह जब बुलडोजर ने इनकी झोपड़ियों को कुचला था तब उस वक्त यह तस्वीर सामने आई थी कि इन लोगों के घर के फर्नीचर और अन्य सामान यूं ही सड़कों पर पड़े हैं। सोफा रियेपर शॉप में बतौर वर्कर काम करने वाले मोहम्मद चांद हर दिन उस जगह पर जाते हैं और इस बात की जांच-पड़ताल करते हैं कि मलबे में उनका कोई सामान तो वहां नहीं रह गया। 

मोहम्मद चांद ने कहा, 'हमें सिर्फ दो दिनों का नोटिस दिया गया था और फिर बुलडोजर आ गया। वो लोग 18-20 बुलडोजर लेकर आए थे। महज4-5 घंटे में उन्होंने सबकुछ कुचल कर रख दिया। हम में से कई लोग अपना सामान तक नहीं हटा सके। जो लोग भी वहां रहते थे वो सभी गरीब हैं और इस योग्य नहीं है कि रातोंरात दूसरे मकान में चले जाएं।' चांद खुद अभी अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रहे हैं।

AAP का BJP पर निशाना

मंगलवार को केजरीवाल सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि Land And Development Office (LNDO) विभाग के जरिए बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने स्लम बस्तियों को ढहाने के लिए कोर्ट में क्रूर रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली विकास प्राधिकरण का काम था कि उनके मकान को ढहने से पहले उनका पुनर्वास करे।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा, 'यहां तक कि हाई कोर्ट ने भी ग्रेड-3 के नियमों को देखते हुए राहत दी थी। लेकिन केंद्र सरकार ने विशेष आदेश देकर ठंड के मौसम में इनके घरों को उजाड़ा। यह चौकाने वाला है कि केंद्र सरकार ने इन गरीब परिवारों, उनके बच्चों और घर के बुजुर्गों के बारे में सोचा भी नहीं। इस इलाके में अपने घर से बेघर हुए अहमद अली ने कहा,' 19 नवंबर को इलाके के स्टेशन हाउस ऑफिसर हर झोपड़ी में आए और हर दरवाजे पर जाकर कहा था कि वो दो दिनों के अंदर घर खाली कर दें। घर ढहाए जाने की वजह से उनके बच्चे परीक्षा तक नहीं दे पाए।'

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