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गाजियाबाद में रहने वालों के लिए जरूरी खबर, भूजल दोहन रोकने को सरकार करेगी यह काम, हर दिन डेढ़ करोड़ लीटर पानी बचेगा

लोनी क्षेत्र में बर्फ, जींस रंगाई और फार्मा की 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, जो बड़े स्तर पर भूजल का दोहन कर रही हैं। इसकी वजह है कि उद्योगों के लिए जरूरी शोधित पानी उपलब्ध नहीं है।

गाजियाबाद में रहने वालों के लिए जरूरी खबर, भूजल दोहन रोकने को सरकार करेगी यह काम, हर दिन डेढ़ करोड़ लीटर पानी बचेगा
Swati Kumariआयुष गंगवार,गाजियाबादTue, 20 Feb 2024 04:20 PM
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भूजल दोहन कम करने के लिए दिल्ली के गाजियाबाद से सटे लोनी में जिले का दूसरा टर्सरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) बनाया जाएगा। इससे उद्योगों को पानी की आपूर्ति की जाएगी। अमृत योजना 2.0 के तहत केंद्र सरकार ने 15 एमएलडी के इस प्लांट का प्रस्ताव स्वीकार किया था, जिसके बाद जल निगम ने 86 करोड़ रुपये डीपीआर बनाई थी। इसे केंद्र और राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।

लोनी क्षेत्र में बर्फ, जींस रंगाई और फार्मा की 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, जो बड़े स्तर पर भूजल का दोहन कर रही हैं। इसकी वजह है कि उद्योगों के लिए जरूरी शोधित पानी उपलब्ध नहीं है। इसीलिए जल निगम ने यहां के उद्यमियों से बात की। सर्वे में चला कि यहां 10-12 एमएलडी पानी की जरूरत है। इसी आधार पर प्रस्ताव बनाया, जिसे केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद डीपीआर बनाई। पिछले दिनों इसे शासन ने भी मंजूरी दे दी। उम्मीद है कि एक सप्ताह में इसका शासनादेश जारी हो जाए, जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

टीटीपी की क्यों जरूरत एसटीपी से शोधित पानी सिर्फ नदियों में छोड़ा जा सकता है। इसका उद्योगों में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। टीटीपी के शोधित पानी में बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर दो मिलीग्राम प्रति लीटर होता है, जबकि एसटीपी के शोधित पानी में इसका स्तर टीटीपी से पांच गुना होता है।

40 एमएलडी के प्लांट का 70 फीसद काम पूरा जिले का पहला टीटीपी इंदिरापुरम में बनाया जा रहा है, जिसका काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है। मई में इसके चालू होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इसमें और वक्त लग सकता है। 40 एमएलडी के इस प्लांट से 1400 औद्योगिक इकाईयों को पानी की आपूर्ति की जाएगी। जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद का कहना है कि तय समय पर टीटीपी का काम पूरा हो जाएगा। 320 करोड़ रुपये से बन रहे इस प्लांट से रोजाना चार करोड़ लीटर पानी उद्योगों को दिया जाएगा। इससे भूजल संरक्षण बढ़ेगा।

डेढ़ करोड़ लीटर पानी बचेगा

गाजियाबाद डार्क जोन में है और भूजल का संकट आने वाले समय में और भी बढ़ सकता है। ऐसे में यह टीटीपी भूजल संरक्षण में मददगार साबित होगा। प्लांट शुरू होने के बाद रोजाना डेढ़ करोड़ लीटर पानी बचेगा, जो अभी हर दिन जमीन से निकाला जा रहा है। लोनी की यंग रूरल इंडस्ट्रियल एसोसिएशन और नीलम कंपाउंड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से 350 से अधिक इकाइयों में टीटीपी से कनेक्शन लेने की बात कही गई है। अभी इनकी संख्या और बढ़ेगी।

जल निगम अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप सिंह, 'लोनी में एसटीपी परिसर में ही टीटीपी बनेगा। 15 एमएलडी के इस प्लांट की लागत 86 करोड़ रुपये अनुमानित है। शासन से स्वीकृति मिल गई है। जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू करेंगे।'

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