जय-वीरू जैसे यार बने खूंखार, टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी की गैंगवॉर में की गई जान; कॉलेज की दोस्ती से दुश्मनी तक की कहानी
दिल्ली के गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की आज तिहाड़ जेल में हुए गैंगवॉर में हत्या कर दी गई। टिल्लू की इस हत्या को रोहिणी कोर्ट में हुई गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के बदले के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की आज तिहाड़ जेल में हुए गैंगवॉर में हत्या कर दी गई। टिल्लू की इस हत्या को रोहिणी कोर्ट में हुई गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के बदले के रूप में देखा जा रहा है। गैंगवॉर में जान गंवाने वाले ये दोनों ही गैंगस्टर कभी एक जमाने में जय-वीरू की तरह जिगरी यार थे।
कौन था टिल्लू ताजपुरिया
गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था और श्रद्धानंद कॉलेज से पास आउट था। कॉलेज के दिनों में टिल्लू और जितेंद्र गोगी की दोस्ती खूब मशहूर थी। दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में सीधे कभी नहीं उतरे पर दोनों अपने उम्मीदवार खड़े करते थे। एक बार कॉलेज के चुनाव एक उम्मीदवार को लेकर दोनों दोस्तों के बीच विवाद हो गया था और इसके बाद वो दोनों अलग हो गए। दोनों ने चुनाव में अपने-अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन वोटिंग से एक दिन पहले टिल्लू के दोस्तों ने जितेंद्र के उम्मीदवार पर गोली चला दी, जिसके बाद दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदलकर गैंगवार तक पहुंच गई थी।
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ऐसे रखा था अपराध की दुनिया में कदम
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ताजपुरिया और गोगी ने भले सीधे चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन वे प्रत्याशियों को बाहुबल मुहैया करा रहे थे। यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने इतने घनिष्ठ मित्र होने के बावजूद दो अलग-अलग उम्मीदवारों का समर्थन करने का फैसला क्यों किया। इसी दौरान वे स्थानीय अपराधियों के संपर्क में आ गए। वास्तव में, गोगी के खिलाफ दर्ज पहला मामला 2008 में अलीपुर में कॉलेज के बाहर उनके और अन्य छात्रों के बीच हुए झगड़े का भी है। उस समय उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद गोगी ने कुछ गैंगस्टर्स से हाथ मिला लिया और टिल्लू ने भी नीरज बवाना, नवीन बाली, सुनील राठी और चीनू जैसे गैंगस्टर्स के साथ संबंध बनाने शुरू कर दिए थे।
गैंगवार में गईं कई जानें
21 जनवरी 2015 को गोगी गैंग द्वारा टिल्लू के करीबी सहयोगी 'राजू चोर' की हत्या के बाद दोनों गैंग के बीच गैंगवार शुरू हो गया था। दोनों गैंग के बीच रंजिश दिन-ब-दिन बढ़ती गई, इसके बाद दोनों गिरोहों के सदस्यों की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया। टिल्लू के गिरोह से सुमित और देवेंद्र प्रधान मारे गए और गोगी के गिरोह से अरुण कमांडो और निरंजन मास्टर मारे गए।
टिल्लू और उसके एक साथी विकास उर्फ विक्की को 2016 में रोहतक के घुसकनी गांव से निरंजन की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बदले की आग यहीं नहीं रुकी और 2018 में दिल्ली के बुराड़ी में दोनों गैंग के बीच गैंगवार हुई जिसमें चार लोगों की हत्या कर दी गई। इनकी गैंगवार में कुछ मासूम भी मारे गए थे।
रोहिणी कोर्ट रूम में कराई थी गोगी की हत्या
2021 में जब टिल्लू दिल्ली की मंडोली और तिहाड़ जेल में था, तब उसने गोगी की हत्या की योजना बनाई। 24 सितंबर 2021 को टिल्लू के साथी उमंग यादव और विनय वकीलों की ड्रेस पहनकर दिल्ली के रोहिणी कोर्ट रूम के अंदर जज के सामने ही जितेंद्र गोगी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इस घटना में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों हमवालर भी मारे गए थे। बताया जाता है कि कथित तौर पर जब पूरी घटना हुई तब टिल्लू ताजपुरिया जेल के अंदर से हमलावरों के साथ लाइव वीडियो चैट कर रहा था।
कुछ सूत्रों के अनुसार, टिल्लू उनसे सवाल पूछ रहा था कि उन्हें रोहिणी कोर्ट पहुंचने में कितना समय लगेगा, अब वे कहां पहुंच गए हैं? जब टिल्लू को पता चला कि दोनों हमलावर कोर्ट रूम के अंदर बैठे हैं और कोर्ट के अंदर और बाहर भारी पुलिस बल तैनात है तो टिल्लू को लगा कि उनका बचना मुश्किल होगा। इसके बाद टिल्लू ने फिर से दो अन्य आरोपियों विनय और उमंग को बुलाया और उनसे उनका ठिकाना पूछा। जब उन्होंने बताया कि वे पार्किंग में हैं तो टिल्लू ने उन्हें वहां से भाग जाने को कहा था।




