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गैंगस्टर कौशल ने पैरोल मिलने के बाद दो साल में इस तरह बदली अपनी पहचान

गैंगस्टर कौशल ने हत्या के एक मामले में दिसंबर 2015 में पैरोल पर बाहर आने के बाद वह दो साल तक शांत रहा। इस दौरान राजस्थान के अलवर और उसके आसपास के क्षेत्र में रहकर उसने अपनी नई पहचान के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। पहचान पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के आधार पर उसने पासपोर्ट बनवाया। इस तरह उसने विदेश आने-जाने का रास्ता तैयार किया। 

एसआईटी से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कौशल दिसंबर 2017 में थाईलैंड गया। वहां से कुछ दिन बाद लौटकर साल 2018 में वह दुबई चला गया था। उसके बाद उसने अपने खास गुर्गे अमित डागर और अनिल लाठ के साथ मिलकर विदेश से कारोबारियों में भय और खौफ दिखाकर रंगदारी मांगने का कारोबार शुरू किया। शुरू में कारोबारियों ने पैसे देने में आनाकानी की तो हवाई फायर भी करवाए गए। उसके बाद उसका कारोबार चल पड़ा। शुरुआत में कुछ चुनिंदा कारोबारियों से शुरू हुआ रंगदारी का कारोबार आठ महीने में सैकड़ों कारोबारियों तक पहुंच गया। 

क्रूज पर सफर कर बदली लोकेशन

कौशल ने क्रूज पर सफर कर कई जगहों की लोकेशन भी बदली थी। ताकि पुलिस और अन्य लोगों को गुमराह किया जा सके। इसके अलावा वह कई वाईफाई या फिर होटल के हॉटस्पॉट का इस्तेमाल कर व्हाट्सअप कॉल और मैसेज भेजता था। इसके अलावा गुरुग्राम सहित अन्य जिलों में कौशल के गुर्गो ने ही शहरवासियों में भया बैठाया था,ताकि कौशल के नाम पर रुपये दिए जाए।

गुुर्गे की मदद से दुबई से भारत भेजी थी सिम

कौशल को जब इसकी जानकारी मिली कि पुलिस को उसके दुबई में होने का पता चल गया है तो उसने पुलिस को चकमा देने के लिए योजना बनाई। कौशल जिस सिम से फोन पर कारोबारियों से फिरौती मांगता था, उस सिम को अपने गुर्गे की मदद से भारत में भेज दिया। उसके बाद हॉटस्पॉट लेकर रंगदारी का ऑडियो मैसेज भेजा। ताकि पुलिस को वह गुमराह कर सके। हालांकि, उसके बाद कौशल ने नई सिम से धमकी देना और रंगदारी मांगना शुरू कर दिया था।

एक साल से नहीं आया वीडियो : एसआईटी के अधिकारी ने बताया कि कौशल ने आखिरी वीडियो दिसंगर 2018 में यू-ट्यूब पर अपलोड किया था। पुलिस अधिकारी का कहना है कि कौशल अपना रूतबा दिखाने के लिए वह वीडियो बनाता है।

मंत्रालय ने तेज की कौशल के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया

फरीदाबाद (व.सं.)। दुबई में कौशल को पकड़ने जाने के बाद फरीदाबाद पुलिस उसे भारत लाने का भरसक प्रयत्न कर रही है। दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रालय के जरिए नियमों की पालना करते हुए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो कौशल को लेकर दूतावास के जरिए इस साल के फरवरी में ही इंटरनेशल अलर्ट नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद से ही दुबई में उसकी तलाश शुरू हो गई थी।

गैंगस्टर कौशल ने दुबई में अपना नाम तक बदल लिया था। नरेश के नाम से उसने अपना पासपोर्ट बनवाकर दुबई में प्रवेश किया था। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि उसने वहां जाकर अपना नाम मोनू रख लिया था। वहां पर उसके जानने वाले उसे मोनू नाम से ही बुलाते थे। वहां वह कहीं नहीं जाता था, बल्कि 24 घंटे अपने कमरे में ही रहता था।

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  • Web Title:Gangster Kaushal changed his identity in two years after getting parole