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गुरुग्राम में ठेकेदारों का फर्जीवाड़ा, नियमों को दरकिनार कर कर बिछा दी पाइपलाइन; जांच में खुलासा

गुरुग्राम में पानी की लाइन और सीवर की लाइन डालने में ठेकेदारों द्वारा भारी गड़बड़ी करने का खुलासा हुआ है। इसका खुलासा निगम के मुख्य अभियंता द्वारा कार्यों के निरीक्षण व बिलों की जांच में हुआ।

गुरुग्राम में ठेकेदारों का फर्जीवाड़ा, नियमों को दरकिनार कर कर बिछा दी पाइपलाइन; जांच में खुलासा
Abhishek Mishraहिन्दुस्तान,गुरुग्रामMon, 20 Nov 2023 07:44 AM
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गुरुग्राम नगर निगम में पानी की लाइन और सीवर की लाइन डालने में ठेकेदारों द्वारा भारी गड़बड़ी करने का खुलासा हुआ है। इसका खुलासा निगम के मुख्य अभियंता द्वारा कार्यों के निरीक्षण व बिलों की जांच में हुआ। मामले का खुलासा होने के बाद मुख्य अभियंता ने सभी कार्यकारी अभियंताओं को सीवर-पानी की लाइन डालने से पहले पाइपों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि नगर निगम द्वारा शहर में पानी की लाइन और सीवर की लाइन डालने के विकास कार्य करवाए जाते हैं। पानी की लाइन डालने को लिए डीआई पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। यह काले रंग के पाइप होते हैं और इन पर कंपनी का मार्को होता है।

वहीं,सीवर लाइन के सभी प्रकार आरसीसी के पाइपों का इस्तेमाल होता है। जांच में खुलासा हुआ है कि नगर निगम में बीते पांच साल में जो पाइप प्रयोग किए गए हैं उनमें किसी भी कार्य में नियमों के अनुसार कंपनी के पाइपों का इस्तेमाल नहीं किया गया।

फर्जी बिल लगाकर करवा रहे बिलों का भुगतान

जांच में खुलासा हुआ है कि पालम विहार में करीब दो किलोमीटर लंबी पानी की लाइन डालने के लिए एक निजी एजेंसी को करीब एक करोड़ रुपये का कार्य दिया गया था। ठेकेदार ने बिना अधिकारियों को कार्य दिखवाए ही पानी की लाइन डाल दी। जबकि पानी लाइन डालने से पहले पाइपों का संबधित अधिकारी को निरीक्षण करना होता है, उसके बाद ही पानी के पाइप डाल सकते हैं, लेकिन जांच में सामने आया कि निगम के किसी भी अधिकारी ने मौके पर जाकर काम की जांच तक नहीं की। ठेकेदार ने अपनी मर्जी से ही पाइप डाल दिए और निगम में बिल के भुगतान के लिए आवेदन कर दिया।

मुख्य अभियंता ने बिल की जांच की तो ठेकेदार ने कंपनी के पाइपों के बिल लगा रखे थे।

यह होता है नियम

नगर निगम के एक उच्च इंजीनियर ने बताया कि पानी व सीवर लाइन के टेंडर होने के बाद कंपनी के पाइप खरीदने होते हैं। पानी के डीआई पाइप जो काले रंग के होते हैं वह या तो फैक्ट्री में मिलते हैं या फिर डीलर से मिलते हैं। अन्य जगहों पर यह पाइप नहीं मिलते हैं। नगर निगम या अन्य विभागों में भी यह पाइप होते हैं। अधिकारी ने बताया कि जब टेंडर एजेंसी को अलॉट हो जाता है तो उसे कंपनी में ऑर्डर देना होता है, कंपनी उस एजेंसी के नाम से बिल बनाती है, लेकिन नगर निगम में जो पाइप ठेकेदार प्रयोग कर रहे हैं वह दो नंबर के पाइप होते हैं। किसी के पास भी कंपनी का बिल नहीं होता है।

कार्यों की नहीं होती है जांच

मुख्य अभियंता द्वारा जारी किए गए ऑर्डर में लिखा है कि उनके द्वारा पानी-सीवर के लाइन डालने के कार्यों का निरीक्षण किया गया। जिसमें पता चला है कि टेंडर की नियम व शर्तों के अनुसार पाइप नहीं लगाए जा रहे हैं और ना ही संबधित अधिकारियों द्वारा इन कार्यों की जांच की जाती है और ना ही पाइपों की जांच की जाती है। उन्होंने निर्देश दिया है कि आगे से निगम द्वारा कोई भी सीवर लाइन व पानी की लाइन डाली जाएगी तो सबंधित अधिकारी को कार्य का निरीक्षण करना होगा और पाइपों की जांच करनी होगी।

पानी व सीवर के लाइन डालने के कुछ कार्यों का निरीक्षण किया था, जिसमें काफी लापरवाही सामने आई है। पाइप गुणवत्ता के हिसाब से नहीं लगाए जा रहे हैं। -विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम

 

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