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8 मई, 2021|1:52|IST

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फ्रीलांस पत्रकार मनदीप पूनिया को मिली जमानत, सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस से बदलसूकी के लिए हुई थी गिरफ्तारी

mandeep poonia    instagram   kissansatyagrah

किसानों के आंदोलन के दौरान सिंघु बॉर्डर पर बीते शनिवार को दिल्ली पुलिस के साथ बदसलूकी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक फ्रीलांस पत्रकार मनदीप पूनिया (Freelance Journalist Mandeep Poonia) को मंगलवार को अदालत ने जमानत दे दी। पूनिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है।

जानकारी के अनुसार, किसान आंदोलन के दौरान सिंघु बॉर्डर पर पुलिस अधिकारी से बदसलूकी के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार मनदीप पूनिया को अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने अपने फैसले में  स्थापित न्यायिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा है कि ‘जमानत देना नियम, जेल भेजना अपवाद’ है। इसके अलावा पूनिया को जमानत देने में मुकदमा दर्ज करने में दिल्ली पुलिस द्वारा की गई देरी को भी आधार बनाया है। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली पुलिस की उन दलीलों को भी सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि पूनिया को जमानत दी गई तो वह मामले को गवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा ने फ्रीलांस पत्रकार पूनिया को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतने ही रकम की जमानत राशि जमा करने की शर्त पर जमानत दे दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ कहासुनी की कथित घटना शाम करीब 6:30 (पीएम) बजे की है और पुलिस ने अगले दिन 1:21 बजे (एएम) मुकदमा दर्ज किया। इसके साथ ही कहा है कि इस मामले में शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी हैं और सभी गवाह भी पुलिस वाले हैं, ऐसे में इस बात की कोई संभावना नहीं है कि यदि पूनिया को जमानत पर रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित करेगा। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पूनिया को जमानत पर रिहा करना न्याय के हित में रहेगा।

मनदीप पूनिया की ओर से पेश वकील प्रदीप खत्री ने जमानत की मांग करते हुए अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल सिंघु बॉर्डर पर समाचार कवरेज के लिए गया था और उसने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया जो अपराध की श्रेणी में आता हो। खत्री ने आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने पूनिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को रिहा किए जाने के बाद वह गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करेगा।

जमानत के लिए लगाई गई है ये शर्तें

  • अनुमति के बगैर विदेश नहीं जाएगा।
  • साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेगा।
  • जांच में सहयोग करेगा और अपना मोबाइल नंबर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को देगा।
  • घर का पता बदलने पर इसकी सूचना पुलिस को एक सप्ताह के भीतर देगा।

बता दें कि रविवार को मनदीप पुनिया को तिहाड़ जेल में ही मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद मनदीप के वकील ने कहा था कि उनकी तरफ से बचाव पक्ष का वकील भी पेश नहीं हुआ था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। 

मीडिया संस्थानों ने की थी पुलिस कार्रवाई की आलोचना 

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप में दो पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मीडिया संस्थानों ने रविवार को आलोचना की थी। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई (पत्रकारों को हिरासत में लेना) स्वतंत्र रिपोर्ट करने के मीडिया के अधिकार में दखलअंदाजी है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में फ्रीलांस पत्रकार मनदीप पुनिया और ऑनलाइन न्यूज इंडिया के धर्मेन्द्र सिंह को दिल्ली पुलिस ने शनिवार शाम हिरासत में लिया। हालांकि, धर्मेंद्र सिंह को बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन पूनिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 

इसके साथ ही कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने भी मनदीप पूनिया की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। हुड्डा ने ट्वीट कर कहा था, ''रोहतक के पत्रकार मनदीप पुनिया को जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मनदीप को लेकर पुलिस को फौरन स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अगर नागरिक व प्रेस स्वतंत्रता को कुचलने की कोई भी कोशिश की जाती है तो ऐसे प्रयास देश स्वीकार नही करेगा।''

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  • Web Title:Farmers protest : Delhi Court grants bail to freelance journalist Mandeep Poonia