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29 नवंबर, 2020|8:54|IST

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LIVE: दिल्ली यूपी बॉर्डर पर किसानों का हंगामा, पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश

farmers at up gate

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नए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलनकारी किसान दिल्ली कूच के लिए राजधानी के बॉर्डरों पर डेरा जमाए बैठे हुए हैं। एक तरफ जहां दिल्ली के सिंघु और टिकरी सीमा पर हरियाणा और पंजाब के किसान डटे हुए हैं तो वहीं, यूपी सीमा पर भी भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत के नेतृत्‍व में किसान हजारों की संख्या में डेरा डाल रखा है। अमित शाह की अपील और पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में किसानों को नए कृषि कानूनों के फायदे बताए के बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सिंघु बॉर्डर पर किसान आगे की रणनीति को लेकर चर्चा कर रहे हैं तो वहीं, यूपी गेट पर किसान उग्र हो गए। यहां पर किसानों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर प्रदर्शन किया। उधर गृहमंत्री द्वारा शर्त के साथ मीटिंग के प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया। सिंघु बॉर्डर पर धरना पर बैठे किसानों के प्रदर्शन के चलते दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रूट डायवर्ट किया है।

किसान आंदोलन लाइव अपडेट्स-

-दिल्ली यूपी बॉर्डर (गाजीपुर-गाजियाबाद) पर किसानों का हंगामा। आक्रोशित किसानों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की।

-बीकेयू क्रांतिकारी (पंजाब) के प्रेजिडेंट सुरजीत एस फुल ने कहा- हमने फैसला किया है कि हमारे मंच से किसी राजनीतिक पार्टी को बोलने का मौका नहीं दिया जाएगा, चाहे कांग्रेस, बीजेपी, आप या कोई अन्य पार्टी हो। हमारी कमिटी दूसेर संगठनों को अनुमति देगी, जो हमारे समर्थन में हैं और हमारे नियमों को मुताबिक बोलेंगे। 

-दिल्ली में कृषि नए कानून के विरोध में धरने पर बैठे किसानों को खाप पंचायत का समर्थन मिला है। रविवार को खाप पंचायत ने फैसला लिया है वह तन-मन धन से देश के किसानों के साथ हैं। रोहतक से विधायक सोमबीर सांगवान ने बताा कि सभी खापें किसानों के सहयोग के लिए कल दिल्ली कूच करेंगी।

-किसानों के आंदोलन को देखते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार किसानों से तीन दौर की वार्ता कर चुकी है, चौथी बार तीन दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया था। सरकार हर स्तर पर खुले मन से बातचीत करने को तैयार है पर किसान यूनियन को बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। उन्हें आंदोलन का रास्ता छोड़ चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए

-दिल्ली सिंघु बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार द्वारा बातचीत के लिए जो कंडीशन थी हम उसे किसान संगठनों का अपमान मानते हैं। अब हम बुराड़ी पार्क में बिलकुल नहीं जाएंगे। हमें पता चला है कि वो पार्क नहीं ओपन ज़ेल है। हम ओपन ज़ेल में जाने की बजाय 5 मेन मार्ग जाम कर दिल्ली की घेराबंदी करेंगे।

-दिल्ली में चार दिन से चल रहे किसानों के आंदोलन के चलते दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अलर्ट जारी किया है। कृषि नए कानून के विरोध में किसानों का धरना जारी है। सिंघु बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने पूरी तरह हाईवे जाम कर दिया है। इसके देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रूट डायवर्ट किया है। पुलिस ने बताया कि मुकरबा चौक और जीटीके रोड से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। लोगों से अपील है कि सिग्नेचर ब्रिज से रोहिणी और जीटीके रोड, नेशनल हाईवे और सिंघु बॉर्डर तक बारी रिंह रोड से लोग बचकर निकलें।

-हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार वॉटर कैनन से किसानों को रोकने की कोशिश न करती तो ये बॉर्डर सील नहीं होते। सरकार को किसानों के लिए पहले ही जगह निर्धारित कर देनी चाहिए थी। हरियाणा सरकार ने सड़कें खुदवाकर किसान के अहम को चोट पहुंचाने का काम किया है।

-आंदोलनकारी अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र से किसानों के आंदोलन का किया समर्थन।

-आंदोलनकारी किसानों को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का भी समर्थन मिला है। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए रविवार को इकट्ठा हुए। वकीलों ने कहा कि राइट टू प्रोटेस्ट हर नागरिक का हक है, किसानों को ये मिलना चाहिए। हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर के बयानों पर भी वकीलों ने निंदा की। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एचएस फुलका ने कहा कि किसानों को उग्रवादी, खालिस्तानी कहा गया इसकी वह कड़ी निंदा करते हैं।

-कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों ने केन्द्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। किसान नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा कि हमने फैसला लिया कि सभी बॉर्डर और रोड ऐसे ही ब्लॉक रहेंगे। गृह मंत्री ने शर्त रखी थी कि अगर हम मैदान में धरना देते हैं तो वो तुरंत मीटिंग के लिए बुला लेंगे। हमने शर्त खारिज़ कर दी है। अगर वो बिना शर्त के मीटिंग के लिए बुलाएंगे तो ही हम जाएंगे।

- राकेश टिकैत ने कहा कि अभी हमें दिल्ली जाने की कोई जल्दी नहीं है। 3 तारीख को वार्ता है सरकार से। उसके बाद ही तय होगा आगे क्या करेंगे।

- रविवार दोपहर यूपी बॉर्डर पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी। इस दौरान किसानों ने दिल्ली-पुलिस की बैरिकेटिंग गिराकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

- दिल्ली के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि किसानों के साथ बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार को तुरंत आयोजित की जानी चाहिए, वे हमारे देश के किसान हैं। उन्हें अपना विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए जहां वे चाहते हैं।

- कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की बैठक चल रही है।

- बीजेपी सांसद शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि किसानों की चिंता हम करते हैं और करते रहेंगे। किसान हमारे दिल में बसते हैं, किसानों को भड़काने का काम कोई न करें। हम जो फैसला लेते हैं वो किसानों के हित में होता है। लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है हमारी अपील है कि वो गलतफहमी के शिकार न हो।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने बताया कि जिस तरह से किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका गया है, ऐसा लग रहा है कि जैसे वे इस देश के हैं ही नहीं। उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया है। चूंकि वे सिख हैं और पंजाब और हरियाणा से आए हैं, इसलिए उन्हें खालिस्तानी कहा जा रहा है। यह किसानों का अपमान है।

- दूसरे राज्यों के दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को सिंघू बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर नाकेबंदी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक यात्री ने कहा कि हम विरोध के कारण कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्थिर संचार के लिए कोई वाहन नहीं है।

- दिल्ली उत्तरी रेंज के संयुक्त सीपी सुरेंद्र यादव ने बताया कि आंदोलनकारी किसान शांति से बैठे हैं और अब तक सहयोग कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य कानून और व्यवस्था बनाए रखना है और यह सुनिश्चित करना है कि व्यवस्था उनके आंदोलन को सुविधाजनक बनाने के लिए हो।

- बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि से संबंधित हाल में लागू किए गए तीन कानूनों को लेकर अपनी असहमति जताते हुए पूरे देश में किसान काफी आक्रोशित व आंदोलित भी हैं। इसके मद्देनजर, किसानों की आम सहमति के बिना बनाए गए, इन कानूनों पर केन्द्र सरकार अगर पुनर्विचार कर ले तो बेहतर।

- कृषि कानूनों के विरोध में किसान प्रदर्शनकारी गाज़ीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी किसान ने कहा कि हम आज दिल्ली कूच करेंगे और जंतर-मंतर या संसद भवन जाएंगे।

- सिंघू बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर किसानों का विरोध जारी, सुरक्षाकर्मी तैनात। यहां पर किसानों ने कल फैसला किया कि वे यहां अपना विरोध जारी रखेंगे और कहीं और नहीं जाएंगे। यह भी तय किया गया था कि वे रणनीति पर चर्चा करने के लिए रोजाना सुबह 11 बजे मिलेंगे। 

- यूपी गेट पर धरने पर बैठे किसान। इस दौरान वे सड़क पर बैठकर खाना खा रहे थे।

- बुराड़ी स्थित निरंकारी सत्संग मैदान किसानों को दिए जाने के 24 घंटे बाद भी किसान सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं।

 

बुराड़ी में राजनीतिक दलों का जमावड़ा लगा
किसानों के समर्थन में बुराड़ी के निरंकारी सत्संग मैदान में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। पंजाब में मुख्य विपक्षी दल और दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी किसानों समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। बुराड़ी मैदान में दिल्ली सरकार की ओर से सारी व्यवस्था की जा रही है। बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। वहीं कांग्रेस के नेता भी अपनी हाजिरी लगा रहे हैं। शनिवार को अलका लांबा भी बुराड़ी सत्संग मैदान पहुंचीं।

किसानों को क्या है नए कानून से डर
- पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र द्वारा हाल ही में लागू किए गये कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी
- उनकी दलील है कि कालांतर में बड़े कॉरपोरेट घराने अपनी मर्जी चलाएंगे और किसानों को उनकी उपज का कम दाम मिलेगा
- नए कानूनों के कारण मंडी प्रणाली खत्म हो जाएगा। किसानों को अपनी फसलों का समुचित दाम नहीं मिलेगा और आढ़ती भी इस धंधे से बाहर हो जाएंगे

क्या है मांग
अहम मांग इन तीनों कानूनों को वापस लेने की है जिनके बारे में उनका दावा है कि ये कानून उनकी फसलों की बिक्री को विनियमन से दूर करते हैं। किसान प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 को भी वापस लेने की मांग कर रहे। उन्हें आशंका है कि इस कानून के बाद उन्हें बिजली पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।

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