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2 मार्च, 2021|12:55|IST

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किसान आंदोलन LIVE : कृषि कानूनों पर घमासान बरकरार, आज भी नहीं बनी बात, किसान अपनी मांगों पर अड़े

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1 / 5सरकार और किसानों के बीच 11वें दौर की बैठक खत्म

delhi  the 11th round of talks between farmer leaders and the central govt  begins in vigyan bhawan

2 / 5Delhi: The 11th round of talks between farmer leaders and the Central govt, begins in Vigyan Bhawan.

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3 / 5किसानों और केंद्र सरकार के बीच आज होने वाली 11वें दौर की वार्ता के लिए किसान नेता विज्ञान भवन पहुंचे। 

farmers protest  file photo   ht

4 / 5Farmers Protest (File Photo : HT)

kisan mazdoor sangharsh committee leader ss pandher

5 / 5Kisan Mazdoor Sangharsh Committee Leader SS Pandher

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नए कृषि कानूनों पर बीच का रास्ता तलाशने के लिए शुक्रवार को किसान नेताओं और सरकार के बीच हुई 11वें दौर की बैठक भी पहले की तरह बेनतीजा खत्म हो गई। अगली बैठक की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है। बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि नए कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है। कानूनों को 18 महीने तक टालने के अलावा इससे बेहतर हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से बेहतर प्रस्ताव दिया था, अगर किसानों के पास इससे अच्छा कोई प्रस्ताव है तो उसे लेकर आएं। ज्ञात हो कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ में दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 58वें दिन भी किसानों का हल्लाबोल जारी है। कृषि कानूनों पर कोई समाधान नहीं निकलने से घमासान अब भी बरकरार है। आज की बैठक में भी सभी किसानों ने तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को फिर दोहराया।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की तरफ से 10वें दौर की वार्ता के दौरान कानूनों के क्रियान्वयन को डेढ़ साल तक के लिए टालने का प्रस्ताव दिया था। इसको लेकर गुरुवार को हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी थी। सरकार की तरफ से कहा गया था कि 1.5 साल तक कानून के क्रियान्वयन को स्थगित किया जा सकता है। इस दौरान किसान यूनियन और सरकार बात करके समाधान ढूंढ सकते हैं। 

LIVE UPDATES

- केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के फायदे के लिए संसद में कृषि सुधार विधेयकों को पारित किया गया, आंदोलन मुख्य रूप से पंजाब के किसानों और कुछ अन्य राज्यों के कुछ किसानों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "सरकार ने आंदोलन खत्म करने के लिए कई प्रस्ताव दिए, लेकिन जब आंदोलन की शुचिता खो जाती है तो कोई समाधान संभव नहीं होता।"

- भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की तरफ से कहा गया कि 1.5 साल की जगह 2 साल तक कृषि कानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगली बैठक केवल तभी हो सकती है जब किसान यूनियनें सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हों, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया। राकेश टिकैत ने कहा कि योजना के अनुसार, ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी को होगी।

- बीकेयू क्रांतिकारी (पंजाब) के राज्य अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान यूनियनों और सरकार के बीच 11वें दौर की बैठक समाप्त हो गई है और अगली बैठक की कोई तारीख सरकार द्वारा तय नहीं की गई है। 

- सरकार के साथ 11वें दौर की वार्ता के बाद किसान नेता ने कहा कि सरकार द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया था वो हमने स्वीकार नहीं किया। कृषि कानूनों को वापस लेने की बात सरकार ने स्वीकार नहीं की। अगली बैठक के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है।

- राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा कि लंच ब्रेक से पहले, किसान नेताओं ने कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई और सरकार ने कहा कि वे संशोधन के लिए तैयार हैं। मंत्री ने हमें सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा और हमने उसे हमारी मांग पर विचार करने के लिए कहा। उसके बाद मंत्री बैठक छोड़कर चले गए, तब से किसान नेता मंत्री के बैठक में लौटने की इंतजार कर रहे हैं। 

- नए कृषि कानूनों पर बीच का रास्ता तलाशने के लिए शुक्रवार को किसान नेताओं और सरकार के बीच हुई 11वें दौर की बैठक भी पहले की तरह बेनतीजा खत्म हो गई। अगली बैठक की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है।

- बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि नए कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है। कानूनों को 18 महीने तक टालने के अलावा इससे बेहतर हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से बेहतर प्रस्ताव दिया था, अगर किसानों के पास इससे अच्छा कोई प्रस्ताव है तो उसे लेकर आएं। 

- दिल्ली : किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच विज्ञान भवन में कृषि कानूनों पर बैठक शुरू हुई। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सोमप्रकाश मौजूद हैं।

- दिल्ली : किसानों और केंद्र सरकार के बीच आज होने वाली 11वें दौर की वार्ता के लिए किसान नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल विज्ञान भवन पहुंचे। 

- 11वें दौर की वार्ता पर अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हमें इससे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। सरकार का रवैया थोड़ा और सकारात्मक होगा तो बेहतर हो सकता है। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था उसमें पुराने प्रस्ताव से थोड़ा फर्क था, इसीलिए वह प्रस्ताव हम आमसभा में ले गए थे। चर्चा के बाद उन लोगों ने उसे मानने से इनकार कर दिया। सरकार को आंदोलन के मूड को समझना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए। 

- 26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर घोषित किसानों की रैली के बारे में हन्नान मोल्लाह ने कहा कि किसान बाहरी रिंग रोड पर आने लगे हैं और अभी और भी आएंगे। हम प्रोग्राम को बदल नहीं सकते। घोषित कार्यक्रम के अनुसार रैली की जाएगी। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड को लेकर बातचीत चल रही है। ट्रैक्टर परेड तो होगी ही। सरकार रिंग रोड पर आने से मना कर रही है, लेकिन किसान पीछे नहीं हटेगा। हम देखते हैं इसे शांतिपूर्ण तरीके से कहां तक कामयाब किया जा सकता है।

- किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता श्रवण सिंह पंढेर पंढेर ने कहा कि सरकार की रणनीति हम पर जाल फेंकने की थी, मिठाई के अंदर जहर छिपाने की। वे विरोध को किसी तरह खत्म करना चाहते हैं। हमारी बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हम उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं। आज केंद्र और किसानों के बीच 11वें दौर की वार्ता होगी। आज की बैठक में हम एमएसपी और तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने पर चर्चा करेंगे। 

- सभी ने शाम को ये फैसला लिया कि हम सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हैं। हम बैठक में सरकार को प्रस्ताव को ठुकराने पर अपनी दलील के साथ जवाब देंगे। आज की चर्चा हमारी मांगों पर केंद्रित होगी : श्रवण सिंह पंढेर, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव

बता दें कि, इससे पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि संयुक्त किसान मोर्चा की गुरुवार को हुई आम सभा की बैठक के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दिए गए कानूनों को डेढ़ साल तक टालने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। सभी किसानों ने एक सुर में तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को दोहराया है। किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि सरकार के किसी भी प्रस्ताव को तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि वे कानूनों को रद्द नहीं करते। सरकार के साथ कल की बैठक में हम कहेंगे कि हमारी केवल एक मांग है, कानूनों को रद्द करना और एमएसपी पर कानून बनाना। इन सभी को सर्वसम्मति से तय किया गया है।

गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालने पर निर्णय नहीं

वहीं, दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर परेड निकालने को लेकर गुरुवार को किसान संगठनों और पुलिस के बीच कोई निर्णय नहीं हो सका। कृषि कानूनों को रद्द करने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 57 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी के आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालने पर अड़े हैं। बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा कि पुलिस ने उन्हें गणतंत्र दिवस के कारण राजधानी में घुसने से मना किया है, जबकि वे दिल्ली में रैली निकालना चाहते हैं। पुलिस की ओर से किसानों को कुंडली- मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर रैली निकालने का प्रस्ताव दिया है, जिसे किसानों ने ठुकरा दिया है। बैठक के बाद किसान नेता दर्शन पाल ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने कहा कि आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड की अनुमति देना मुश्किल है और सरकार भी इसके लिए तैयार नहीं है, लेकिन किसानों ने कह दिया है कि वे रिंग रोड पर ही परेड करेंगे। पुलिस और किसानों के बीच फिर कल बैठक होगी। वहीं, किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि 26 जनवरी का कार्यक्रम अटल है और यह हर हाल में होगा। दिल्ली पुलिस किसानों के ट्रैक्टर परेड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस संबंध में कोई आदेश देने से मना कर दिया था और कहा था कि यह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में हैं। 

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  • Web Title:farmers protest : 11th round talks between centre govt and farmers unions on farm laws live updates