ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCRदिल्ली की हवा साफ करने के लिए GST लगाई जाए, किसने दी ऐसी सलाह; कहा- सख्ती जरूरी

दिल्ली की हवा साफ करने के लिए GST लगाई जाए, किसने दी ऐसी सलाह; कहा- सख्ती जरूरी

एक प्रमुख पर्यावरणविद् ने कहा है कि दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए सख्त फैसले लेने की जरूरत है। इसके दायरे में समृद्ध लोगों को भी शामिल किया जाए जो इस समस्या में अहम योगदान देते हैं।

दिल्ली की हवा साफ करने के लिए GST लगाई जाए, किसने दी ऐसी सलाह; कहा- सख्ती जरूरी
Subodh Mishraपीटीआई,नई दिल्लीMon, 17 Jun 2024 05:03 PM
ऐप पर पढ़ें

प्रमुख पर्यावरणविद् और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा है कि दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए सख्त फैसले लेने की जरूरत है। इसे सुविधाजनक व्यवहार करके हासिल नहीं किया जा सकता है। इसके दायरे में उन समृद्ध लोगों को भी शामिल किया जाए जो इस समस्या में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में नारायण ने कहा कि हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों ने दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मसलन, कोयले पर प्रतिबंध लगाना और बीएस VI ईंधन शामिल करना शामिल है, लेकिन इससे निपटने की गति अभी अपर्याप्त है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मौसम पैटर्न इस समस्या को और बढ़ा रहा है। 

नारायण ने कहा कि सर्दियों में किसानों द्वारा समय-समय पर फसल अवशेष जलाना प्राथमिक चिंता का विषय नहीं है। इसके बजाए, परिवहन और उद्योगों सहित शहर के भीतर प्रदूषण के लगातार और प्रमुख स्रोत अधिक चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार से मेरा एकमात्र अनुरोध है कि वायु प्रदूषण पर आगे बढ़ने के लिए कुछ सख्त फैसले ले। हर किसी के साथ, खासकर दिल्ली के अमीरों के साथ अच्छा व्यवहार करके हम कभी भी दिल्ली की हवा को साफ नहीं कर पाएंगे। 

नारायण, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण का हिस्सा थीं, ने कहा कि अगली सरकार से उनका सबसे बड़ा अनुरोध यह है कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए प्राकृतिक गैस को जीएसटी के तहत लाए। उन्होंने केंद्र की नई सरकार से प्राकृतिक गैस को जीएसटी व्यवस्था के तहत लाने का आग्रह करते हुए तर्क दिया कि गैस पर मौजूदा तीन गुना कराधान इसे अप्रभावी बनाता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वच्छ गैस को ज्यादा व्यवहारिक विकल्प बना देगा।

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाकर वाहन प्रदूषण को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। बताया कि पिछले दिनों किए गए अध्ययन से पता चलता है कि दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में परिवहन का योगदान 17.9 प्रतिशत से 39.2 प्रतिशत है, जबकि उद्योगों का योगदान 2.3 प्रतिशत से 28.9 प्रतिशत तक है।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला यह देश का एकमात्र शहर है। दिल्ली ने अपना अंतिम कोयला आधारित बिजली संयंत्र बंद कर दिया और बिजली उत्पादन के लिए गैस का उपयोग शुरू कर दिया। सरकार ने BSVI ईंधन की शुरुआत की। इन पहलों से प्रदूषण के स्तर में कमी आ रही है।

हालांकि, नारायण ने कहा कि दो प्रमुख कारक हैं जो प्रदूषण की समस्या को बढ़ा रहे हैं - एक बिगड़ती मौसम की स्थिति, जो मानव नियंत्रण से परे है और दूसरा संकट से निपटने की धीमी गति। नारायण ने कहा कि पहाड़ों पर कम बर्फबारी और दिल्ली में कम बारिश हुई, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दिल्ली में बस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए उसे मेट्रो रेल और पार्किंग सुविधाओं के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है।
कहा कि  2021 तक की गई सभी कार्रवाइयों के बाद हम उस गति से आगे नहीं बढ़ सके, जो संकट से निपटने के लिए जरूरी है। 

पर्यावरणविद् ने कहा कि दुनिया के राजधानी शहरों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता सबसे खराब है। अगस्त में शिकागो विश्वविद्यालय में ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण दिल्ली में लोगों की आयु लगभग 12 साल कम कर रहा है।

Advertisement