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शराब घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेज आरोपी संग शेयर किए जा सकते हैं? कोर्ट के सवाल पर ईडी ने मांगा टाइम

दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े हर दस्तावेज को आरोपी के साथ शेयर किया जाना चाहिए या नहीं इसपर कोर्ट ने प्रॉसीक्यूटिंग एजेंसी से जवाब मांगा है। जिसका जवाब देने के लिए ईडी ने समय मांगा है।

शराब घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेज आरोपी संग शेयर किए जा सकते हैं? कोर्ट के सवाल पर ईडी ने मांगा टाइम
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 01 May 2024 02:28 PM
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दिल्ली शराब घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हर एक दस्तावेज आरोपी के साथ शेयर कर सकता है या नहीं, इसका फैसला दिल्ली की एक अदालत को करना है। दरअसल, अदालत ने कार्यवाही के दौरान प्रॉसीक्यूटिंग एजेंसी ने एक सवाल पूछा कि क्या एजेंसी द्वारा इकट्ठा किए गए सभी दस्तावेजों को शेयर नहीं किया जा सकता जिससे समय बचें और सुनवाई में तेजी लाई जाए? इन दस्तावेजों में वो डॉक्यूमेंट भी शामिल होंगे जिनपर केस तैयार करते वक्त ईडी ने भरोसी नहीं किया हो? इस सवालों पर दिल्ली की अदालत के फैसले से डिफेंस को अपने केस को आकार देने में मदद मिलेगी।

अबतक अदालत दो बार- 18 अप्रैल और 26 अप्रैल को ईडी को ऐसा करने के लिए कह चुकी है। हालांकि एजेंसी ने इसके लिए और समय मांगा है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने 18 अप्रैल के आदेश में कहा था, ‘कार्यवाही के दौरान, अदालत द्वारा प्रॉसीक्यूटिंग एजेंसी से एक प्रश्न पूछा गया है कि बचे हुए/बिना निरीक्षण किए गए 'अविश्वसनीय' दस्तावेजों को आरोपी/आरोपी के वकील को डिजीटल रूप में क्यों नहीं प्रदान किया जा सकता, ताकि समय बचे और कार्यवाही में तेजी लाई जा सके।’

अदालत ने उसी आदेश में कहा, ‘ईडी के विशेष वकील ने अदालत का ध्यान सीआरपीसी धारा 91 के प्रावधान की ओर आकर्षित किया है। हालांकि, कुछ तर्कों के बाद, उन्होंने कहा कि यदि इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है, तो मामले में तेजी आएगी। उनका कहना है कि प्रॉसीक्यूटिंग एजेंसी को यह पता लगाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाता है कि इतने बड़े रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण कैसे किया जा सकता है।’

हालांकि, एक हफ्ते बाद 26 अप्रैल को विशेष वकील ने फिर से कोर्ट से इसपर जवाब देने के लिए समय मांगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पता चला है कि ईडी सभी दस्तावेजों की केवल जांच की अनुमति देने और उन्हें आरोपियों के साथ पूरी तरह से साझा नहीं करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि गोपनीयता की चिंता उन पहलुओं में से एक है जो केस के फैसले पर असर डालेंगी। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा, ‘एजेंसी के पास सभी आरोपियों के उपकरणों के डिजिटल रिकॉर्ड होना एक बात है, लेकिन उन्हें सभी आरोपियों के साथ साझा करना गोपनीयता का सवाल उठाता है क्योंकि कई आरोपी प्रतिस्पर्धी (कॉम्पीटिंग) व्यवसाय से हैं।