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दिल्ली यूनिवर्सिटी ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर क्यों लगाया 7 लाख का जुर्माना, क्या है वजह

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक टीचर पर करीब सात लाख का फाइन लगाया है। असिस्टेंट प्रोफेसर हॉस्टल में दो साल से ज्यादा समय से रह रही हैं क्योंकि उन्हें ठीक घर नहीं मिला। उनका नाम शर्मिष्ठा अत्रेजा है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर क्यों लगाया 7 लाख का जुर्माना, क्या है वजह
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 25 Jun 2024 10:00 AM
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दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक दृष्टिबाधित (विजुअली इम्पेयर्ड) असिस्टेंट प्रोफेसर पर करीब सात लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। उनपर यह फाइन अंडरग्रेजुएट गर्ल्स हॉस्टल में 'निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने' के लिए लगाया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर हॉस्टल में दो साल से ज्यादा समय से रह रही हैं क्योंकि उन्हें ठीक घर नहीं मिला। प्रोफेसर का नाम शर्मिष्ठा अत्रेजा है जो 2015 से डीयू की आर्ट्स फैकल्टी में फिलोसॉफी पढ़ा रही हैं। 

अत्रेजा शुरुआत में किराए के एक घर में रह रही थीं, जिसकी व्यवस्था उन्होंने खुद की थी, क्योंकि उन्हें यूनिवर्सिटी में दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए सुलभ किसी भी आवास से 'वंचित' कर दिया गया था। 2021 में उन्हें हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरा आवंटित किया गया क्योंकि वह वहां रहने वाले छात्रों के लिए रेजिडेंट ट्यूटर बन गई थीं। अगस्त 2022 में जब रेजिडेंट ट्यूटर के तौर पर उनका कार्यकाल खत्म हो गया, तो यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उन्हें कमरा खाली करने के लिए कहा।

अत्रेजा ने कहा, 'मुझे मॉल रोड पर दूसरा कमरा आवंटित किया गया, लेकिन ग्राउंड फ्लोर नहीं होने की वजह से यह मेरे लिए असुविधाजनक था। यह मेरी दृष्टि दोष के कारण यह मेरे लिए एक्सेसिबल नहीं था। वहां से मुझे डिपार्टमेंट तक पहुंचने के लिए दो मुख्य सड़कों को पार करना पड़ता। लगातार आग्रह के बावजूद, यूनिवर्सिटी ने कई बार मुझे लड़कियों के हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर किया।' 2023 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने आदेश जारी किया। इसके बाद डीयू एस्टेट विभाग ने 15 मार्च 2024 को अत्रेजा को मौरिस नगर में फ्लैट देने की पेशकश की।

डिसेबिलिटी राइट्स फ्रंट (डीआरएफ) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष (डूटा) को लिखे पत्र में कहा है कि एस्टेट डिपार्टमेंट ने 18 मार्च को उसे पोजेशन लेटर दिया था, जिसमें उन्हें '10 दिनों के अंतर शिफ्ट करने' के लिए कहा गया था। अब जब उस पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। यूनिवर्सिटी हर महीने उनकी कमाई का 30 प्रतिशत काट रहा है, अत्रेजा ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर अपनी स्थिति बताई है। इस मामले पर डीयू प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने कहा देना पड़ता है।'
कि उन्होंने मदद के लिए हर संभव कोशिश की। उन्होंने कहा, 'हमने प्रोफेसर की मदद के लिए हर संभव कोशिश की है, लेकिन हर कर्मचारी को आवंटित अवधि से ज्यादा समय तक रहने पर लाइसेंस शुल्क

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