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DU के इस कॉलेज ने छात्रों को दिया नोटिस; PTM के लिए पैरेंट्स को बुलाया, क्या है मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज ने छात्रों को नोटिस जारी किया है। जिसमें उन्हें अपने पैरेंट्स को पीटीएम के लिए कॉलेज लाने को कहा गया है। नोटिस मिलने के बाद छात्र परेशान हैं।

DU के इस कॉलेज ने छात्रों को दिया नोटिस; PTM के लिए पैरेंट्स को बुलाया, क्या है मामला
Sneha Baluniहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीTue, 07 May 2024 03:01 PM
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हम सभी ने स्कूल के दिनों में पीटीएम यानी पैरेंट्स टीचर मीटिंग जरूर अटेंड की है। मगर क्या आप कभी कॉलेज में पीटीएम के लिए गए हैं। आपका जवाब होगा नहीं क्योंकि कॉलेज में ऐसा नहीं होता। कॉलेज में छात्रों के साथ एडल्य (व्यस्क) की तरह बिहेव किया जाता है इसलिए बिना किसी गंभीर या बेहद जरूरी कारण के पैरेंट्स को बहुत कम बुलाया जाता है। मगर इन दिनों दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक कॉलेज पीटीएम की वजह से चर्चा में है। कॉलेज ने तीन मई को एक नोटिस जारी किया है। जिसमें छात्रों को अपने पैरेंट्स के साथ कॉलेज आने को कहा गया है।

ये कॉलेज है नॉर्थ कैंपस का हंसराज कॉलेज। नोटिस में ऐसे छात्रों को अपने पैरेंट्स को मीटिंग के लिए कॉलेज लाने के लिए कहा गया है जिनकी अटेंडेंस कम है। कॉलेज अधिकारियों की राय है कि छात्रों के बारे में ऐसी अहम जानकारी उनके पैरेंट्स के साथ शेयर करनी जरूरी है। लेकिन छात्र इससे  परेशान हैं और उन्हे लग रहा है कि वे वापस स्कूल में आ गए हैं। नोटिस पर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह के कमेंट्स आ रहे हैं।

हंसराज में बीए (प्रोग्राम) सेकेंड ईयर के छात्र अनुज राणा ने कहा, 'मुझे और मेरे दोस्तों को कम अटेंडेंस को लेकर नोटिस मिला है और टीचर्स ने हमें अपने पैरेंट्स को लाने के लिए कहा है।' राणा मे कहा, मेरे पैरेंट्स देहरादून (उत्तराखंड) में रहते हैं और दिल्ली नहीं आ सकते इसलिए मुझे एक लोकल गार्जियन लाने के लिए कहा गया, लेकिन मेरे पास यहां कोई नहीं है। मेरी कम अटेंडेंस का कारण यह है कि मैं शहर में अपने पैर जमाने के लिए एक फ्रीलांस मॉडल और प्रोडक्ट डिजाइनर के रूप में काम करता हूं। मेरे फ्लैटमेट को भी अपने पैरेंट्स को बुलाने के लिए कहा गया है। हम एक-दूसरे के गाजियन बनने पर विचार कर रहे हैं। 

कॉलेज के फाइनल ईयर के एक छात्र ने कहा, 'पिछले सेमेस्टर से ही हमारे कॉलेज के अधिकारियों ने उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी शुरू कर दी है जिनकी अटेंडेंस कम है। डिफॉल्टर हमेशा से रहे हैं, लेकिन पिछले सेमेस्टर के बाद ही कई छात्रों को एक डिक्लेरेशन पर साइन करने के लिए कहा गया कि वे अपनी अटेंडेंस में सुधार करने का प्रयास करेंगे। मैं एक कल्चरल सोसाइटी का हिस्सा हूं और मेरे प्रोफेसर मुझे पहचानते हैं इसलिए मेरे मामले में अटेंडेंस समस्या नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि दूसरों के साथ यह अन्याय है।'

वहीं इस पूरे मामले पर कॉलेज प्रिंसिपल रमा शर्मा ने कहा, 'पीटीएम की व्यवस्था इसलिए की गई है क्योंकि पिछले साल जब अटेंडेंस के मुद्दे बाद में सामने आए थे, तो पैरेंट्स ने कहा था कि उन्हें अपने बच्चों के क्लास अटेंड नहीं करने को लेकर कोई जानकारी नहीं है... हम आम तौर पर उस आईडी पर ईमेल करते हैं जिसे छात्र सबमिट करते हैं, लेकिन कई लोग अपनी खुद की ईमेल आईडी का लिख देते हैं (अपने गार्जियन के बजाय)। ऐसी स्थिति में माता-पिता को कभी पता नहीं चलता कि उनके बच्चों की अटेंडेंस कम है, और बाद में वे हमसे सवाल करते हैं कि हमने समय पर उन्हें यह जानकारी क्यों नहीं दी। इसलिए हमारा पैरेंटेस के साथ मीटिंग करना जरूरी हो जाता है, खासकर अब जबकि एडमिशन भी ऑनलाइन हो रहे हैं।'