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ऐसे तो बंजर रेगिस्तान हो जाएगी दिल्ली, मुंगेशपुर में 52.3 डिग्री तापमान पर हाईकोर्ट

दिल्ली के मुंगेशपुर क्षेत्र में हाल ही में तापमान बढ़कर 52.3 डिग्री सेल्सियस हो जाने की खबरों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। अदालत ने क्या बातें कही जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट...

ऐसे तो बंजर रेगिस्तान हो जाएगी दिल्ली, मुंगेशपुर में 52.3 डिग्री तापमान पर हाईकोर्ट
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Krishna Singhहिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 02 Jun 2024 06:12 PM
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दिल्ली के मुंगेशपुर क्षेत्र में हाल ही में तापमान बढ़कर 52.3 डिग्री सेल्सियस हो जाने की खबरों पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कठोर टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि यदि वनों की कटाई के प्रति मौजूदा पीढ़ी रुख उदासीन बना रहा, तो दिल्ली बंजर रेगिस्तान के रूप में तब्दील हो जाएगी। हालांकि मुंगेशपुर क्षेत्र में बुधवार को अधिकतम तापमान 52.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने पर मौसम विभाग की सफाई आ चुकी है। आईमडी ने शनिवार को बयान जारी कर के कहा था कि ऐसा सेंसर में खराबी की वजह से हुआ था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में बढ़े तापमान को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने हाल ही में तापमान में 52.3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए कहा कि यदि वर्तमान पीढ़ी वनों की कटाई पर उदासीन दृष्टिकोण जारी रखती है तो राष्ट्रीय राजधानी बंजर रेगिस्तान बन जाएगी। बीते बुधवार को मुंगेशपुर इलाके में बुधवार को अधिकतम तापमान 52.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो शहर में अब तक का सबसे अधिक तापमान है।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा कि इस तथ्य पर न्यायिक संज्ञान लिया गया है , वह दिन दूर नहीं है जब यह शहर केवल एक बंजर रेगिस्तान बन कर रह जाएगा। हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति नजमी वज़ीरी जो वन अधिकारियों की एक आंतरिक विभागीय समिति का अध्यक्ष हैं ने सूचित किया था कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया जा सकता जहां अध्यक्ष (न्यायाधीश वज़ीरी) कार्यालय स्थान या सचिवीय और सहायक कर्मचारियों या यहां तक ​​​​कि परिवहन की कमी के कारण जिम्मेदारियों का निर्वहन न कर सकें। अदालत ने कहा कि वन विभाग को इस मामले को पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाने का निर्देश देना उचित माना जाता है और किसी भी स्थिति में मंजूरी में 15 जून से अधिक देरी नहीं की जाएगी। 

पिछले साल 21 दिसंबर को, उच्च न्यायालय ने मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, उप वन संरक्षक (सुरक्षा और निगरानी) और डीम्ड वनों के संरक्षण के लिए संबंधित डीसीएफ की एक समिति के गठन का निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि समिति यह सुनिश्चित करेगी कि संरक्षित और समझे जाने वाले दोनों प्रकार के वनों की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्ग्रहण और संवर्द्धन के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।