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28 अक्तूबर, 2020|7:59|IST

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दिल्ली हिंसा मामला : अभी जेल में ही रहेगा उमर खालिद, कोर्ट ने 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा

umar khalid

दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में अपनी कथित भूमिका के संबंध में गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) को 22 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में पकड़े गए उमर खालिद दस दिन की पुलिस रिमांड पर था। उसकी रिमांड अवधि आज 24 सितंबर को खत्म होने के बाद उसे फिर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश किया गया था, जहां से उसे 22 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।  

ज्ञात रहे कि दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन अदालत ने खालिद को 10 दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया था। दिल्ली दंगे के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 02 सितंबर को कुछ घंटे तक उमर से पूछताछ की थी। इससे पहले पुलिस ने दंगे से जुड़े एक अन्य मामले में उमर के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि (निषेध) कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी दंगे के पीछे कथित साजिश के मामले में उमर से पूछताछ की थी। पुलिस ने उमर खालिद का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया था।

दिल्ली दंगों की चार्जशीट : खुर्शीद और बृंदा करात ने दिए थे भड़काऊ भाषण

दंगों की जांच कर रही पुलिस ने एफआईआर में दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा ''पूर्व-नियोजित साजिश'' थी, जिसे कथित रूप से उमर खालिद और दो अन्य लोगों ने अंजाम दिया था। उमर खालिद के खिलाफ राजद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच द्वेष पैदा करने और दंगा भड़काने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उमर खालिद ने कथित रूप से दो अलग-अलग जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए और लोगों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने और उन्हें जाम करने की अपील की ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दुष्प्रचार किया जा सके कि भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।  

एफआईआर के अनुसार, इस षड़यंत्र को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कई घरों में हथियार, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें और पत्थर जमा किए गए। पुलिस का आरोप है कि सह-आरोपी दानिश को कथित रूप से दो अलग-अलग जगहों पर लोगों को जमा करने और दंगा भड़काने की जिम्मेदारी दी गई थी। 

एफआईआर में कहा गया है कि 23 फरवरी को महिलाओं और बच्चों को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़क बंद करने के लिए कहा गया ताकि आसपास रह रहे लोगों के बीच तनाव उत्पन्न किया जा सके। 

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं। इस दौरान कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।  

(न्यूज एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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  • Web Title:Delhi violence case: Court sends former JNU student Umar Khalid to judicial custody till 22 October