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एक-दूसरे को गले लगाया, बच्चों को सीट के नीचे छिपाया; रियासी के पीड़ित ने सुनाई दास्तां

Reasi Attack News: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के आतंकी हमले में जिंदा बचे दिल्ली के शंकर भवानी परिवार के साथ माता वैष्णों देवी के दर्शन के लिए गए थे। उन्होंने हमले की खौफनाक दास्तां सुनाई।

एक-दूसरे को गले लगाया, बच्चों को सीट के नीचे छिपाया; रियासी के पीड़ित ने सुनाई दास्तां
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 11 Jun 2024 01:15 PM
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Reasi Attack News: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही बस पर हुए आतंकी हमले में जीवित बचे दिल्ली के भवानी शंकर ने दहशत के उन पलों की दास्तां सुनाई जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई जबकि 41 घायल हैं। दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में रहने वाले भवानी शंकर अपनी शादी की सालगिरह पर पत्नी राधा देवी और दो छोटे बच्चों के साथ वैष्णो देवी मंदिर गए थे। उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 'जब पहाड़ियों से गोलियां चल रही थीं तो मैंने नीचे झुककर अपने दोनों बच्चों को बस की सीट के नीचे छिपा दिया... मैं दहशत के उन 20-25 मिनटों को कभी नहीं भूल पाऊंगा।'

शंकर का परिवार दिल्ली के उन पांच लोगों में शामिल है जो हमले में घायल हुए हैं। वर्तमान में सभी का जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि वह छह जून को अपनी शादी की सालगिरह पर कटरा स्थित वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करने गए थे। उन्होंने कहा कि उनके साथ पत्नी राधा, पांच साल की बेटी दीक्षा और तीन साल का बेटा राघव भी था। शिव खोरी मंदिर से कटरा की ओर जा रही 53 सीट वाली बस पर रविवार को आतंकियों ने हमला कर दिया था। 

लौटते वक्त हमला

हमले की वजह से बस सड़क से फिसलकर गहरी खाई में गिर गई। घटना रविवार शाम रियासी के पोनी क्षेत्र के तेरयाथ गांव के पास हुई। शंकर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, 'छह जून को हम दिल्ली से श्री शक्ति एक्सप्रेस में सवार हुए और कटरा पहुंचे। सात जून को हम वैष्णो देवी मंदिर गए और आठ जून की आधी रात तक अपने होटल के कमरे में लौट आए। नौ जून को हमने कटरा से शिव खोरी मंदिर के लिए बस ली और यात्रा के लिए 250 रुपये के दो टिकट खरीदे।' शंकर ने बताया कि मंदिर से लौटते वक्त बस पर हमला हुआ।

दहशत के पलों को याद करके सहम गए शंकर

शंकर ने कहा, 'बस में हमारे बच्चे हमारी गोद में थे। हमने शाम लगभग छह बजे गोलियों की आवाज सुनी। केवल 10-15 सेकंड में, 20-25 से अधिक गोलियां चलाई गईं। एक गोली ड्राइवर को लगी और बस नियंत्रण से बाहर हो गई।' उन्होंने बताया कि बस हवा में घूम गई और बाद में अपनी सीधी स्थिति में आ गई लेकिन इसके पहिए पहाड़ी इलाके में पत्थरों और पेड़ों में फंस गए। दहशत के पलों को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं नीचे झुक गया और अपने दोनों बच्चों को सीट के नीचे छिपा दिया क्योंकि पहाड़ियों से गोलीबारी जारी थी। हमने यह सोचकर एक-दूसरे को कसकर गले लगाया कि यह हमारे जीवन का अंतिम क्षण हो सकता है। कुछ लोग चिल्ला रहे थे- हमला हो गया है। हम 20-25 मिनट तक इसी स्थिति में रहे।'

पत्नी का अलग अस्पताल में चल रहा इलाज

शंकर और उनके दो बच्चे एक ही अस्पताल में भर्ती हैं जबकि उनकी पत्नी का इलाज जम्मू-कश्मीर के दूसरे अस्पताल में हो रहा है। उन्होंने कहा, 'मेरे बेटे का हाथ टूट गया है और मेरी बेटी के सिर में चोटें आई हैं। मेरी पीठ में अंदरूनी चोटें आई हैं और मेरी पत्नी के सिर तथा पैरों में कई चोटें आई हैं।' हमले में जीवित बचे शंकर दिल्ली में इंडियन ऑयल में तैनात एक अधिकारी के यहां चालक के पद पर कार्यरत हैं। वह अपनी पत्नी, पिता और एक अन्य रिश्तेदार के साथ दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में रहते हैं।