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8 अगस्त, 2020|2:31|IST

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दिल्ली में हेरोइन, अफीम की जगह सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी बढ़ी

synthetic drug

राजधानी दिल्ली में पौधों से पैदा होने वाले प्लांट आधारित ड्रग्स (हेरोइन, अफीम और कोकेन) की जगह सिंथेटिक ड्रग्स और फार्मास्युटिकल ड्रग्स की तस्करी अधिक हो रही है। दिल्ली में पिछले दिनों ड्रग्स की तस्करी को लेकर हुई धर-पकड़ की कार्रवाई में इसी तरह के तस्कर अधिक पकड़े गए। इतना ही नहीं, दिल्ली में सिंथेटिक ड्रग्स की बरामदगी में भी करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।

आलम यह है कि लैबोरेट्री में केमिकल्स से बनने वाले ये ड्रग्स रेव पार्टी तक में प्लांट आधारित ड्रग्स की जगह लेते जा रहे हैं। पार्टी ड्रग्स के रूप में मेथ, एलएसडी और मिथाइलीनडाईऑक्सी/ मेथैमफेटामाइन मशहूर हो रहे हैं। हाल-फिलहाल के दिनों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की हुई कार्रवाई में करीब दो दर्जन सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी करने वाले गिरोह की पहचान की गई है। इसके आधार पर इन गिरोह के तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई भी की जा रही है और इनके मूल स्रोत तक पहुंचने की कोशिश में पूरे चेन को खंगाला जा रहा है।  

क्या है सिंथेटिक ड्रग्स
केमिकल से लैबोरेट्री में बनाए जाने वाले नशीले पदार्थों (दवाओं) को सिंथेटिक ड्रग्स कहते हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक इसकी डिमांड पार्टी सर्किट या रेव पार्टी में ज्यादा होती है। एनसीबी के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में पिछले दो सालों में नशीली दवाओं का यह नया ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। पहले कोकेन व हेरोइन का सेवन करने वाले नौजवान अब मेथ, एलएसडी और म्याऊं-म्याऊं को पसंद कर रहे हैं। कोकेन लैटिन अमेरिका में पैदा होने वाले प्लांट से तैयार कुदरती नशा है, जबकि मेथ और म्याऊं-म्याऊं लैबोरेट्री में केमिकल्स से बनती है।

रिस्क कम
एनसीबी के मुताबिक, इस बदलते ट्रेंड की सबसे बड़ी वजह है कि लोग दवाओं की आड़ में ऐसे सिंथेटिक ड्रग्स का नशीले पदार्थ के रूप मे इस्तेमाल करते हैं। लिहाजा, समाज में लोगों को जल्दी पता नहीं चल पाता है और रिस्क कम होता है। तस्करों के लिए एजेंसियों से बचकर इसे लाने में प्लांट ड्रग्स से कुछ कम मुश्किल होती है। 

ये सिंथेटिक ड्रग्स हैं चलन में

  • मेथाक्वोलोन
  • एम्फेटामाइन
  • एलएसडी और 
  • म्याऊं-म्याऊं

इन 10 इलाकों सबसे ज्यादा दबोचे गए सप्लायर
आईएसबीटी व आसपास, करनाल रोड, आईजीआई एयरपोर्ट, फॉरेन पोस्ट ऑफिस कीर्ति नगर, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन व आसपास के इलाके, द्वारका, नोएडा, छतरपुर, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाके और महिपालपुर 

क्या कहना है डिप्टी डायरेक्टर ऑपरेशंस का
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर ऑपरेशंस, केपीएस मल्होत्रा का कहना है कि हमलोग पिछले दो सालों में करीब ऐसे दो दर्जन गिरोह की पहचान कर तस्करों को दबोच चुके हैं और आगे भी यह अभियान जारी है। जिन इलाकों में यह खासतौर से डिलीवरी करने आते हैं, उन इलाकों में हमारी टीम की तैनाती रहती है। 

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  • Web Title:Delhi : Smuggling of synthetic drugs increased