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दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद को झटका, अदालत ने खारिज की जमानत याचिका

दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपों का सामना कर रहे उमर खालिद को तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने यूएपीए के आरोपों में उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद को झटका, अदालत ने खारिज की जमानत याचिका
Krishna Singhलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 28 May 2024 03:02 PM
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दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपों का सामना कर रहे उमर खालिद को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने यूएपीए के तहत दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में आरोपी है। उमर खालिद ने अदालत में दूसरी बार नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

इससे पहले मार्च 2022 में ट्रायल कोर्ट ने उमर खालिद की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नई जमानत याचिका दायर की थी। खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग करने वाली अपनी याचिका वापस ले ली थी। खालिद ने अक्टूबर 2022 में जमानत देने से इनकार करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने उमर खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को याचिका वापस लेने की इजाजत दी थी। कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च अदालत में कहा था कि परिस्थतियां बदल गई हैं। ट्रायल कोर्ट के समक्ष नए सिरे से जमानत मांगने का प्रयास किया गया है, इस वजह से वह याचिका वापस ले रहे हैं। 

बता दें कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य लोगों पर फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोप हैं। इनके खिलाफ यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13, 16, 17 और 18 के साथ शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 25 और 27 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

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