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दिल्ली में ऑड-ईवन कितना उचित, विपक्षी दलों के साथ विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल, कहां खामी?

Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने सख्त कदमों का ऐलान किया है। दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन नियम लागू करने की घोषणा की है। इस पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।

दिल्ली में ऑड-ईवन कितना उचित, विपक्षी दलों के साथ विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल, कहां खामी?
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीTue, 07 Nov 2023 12:24 AM
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दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए AAP की सरकार ने चार साल बाद फिर से ऑड-ईवन नियम लागू करने की घोषणा की है। हालांकि इस नियम के प्रभावी होने को लेकर विशेषज्ञों की मिश्रित राय है। इस नियम को पहली बार 2016 में लागू किया गया था। विपक्षी भाजपा ने केजरीवाल सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। वहीं पर्यावरणविदों का कहना है कि इस नियम को लागू करने से प्रदूषण से निपटने में दीर्घकालिक स्तर पर लाभ नहीं मिलेगा। यह बढ़ते प्रदूषण से केवल कुछ दिनों की राहत दिलाएगी।

ऑड-ईवन नियम की प्रभाविता पर सवाल
पर्यावरणविद ज्योति पांडे लवकरे ने दिल्ली में ऑड-ईवन नियम की प्रभाविता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा- हम इस जहरीली हवा में मर रहे हैं। पूरे साल प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहता है लेकिन दिल्ली में हमने खराब वायु गुणवत्ता को सामान्य बना दिया है। उसका राजनीतिकरण कर दिया है। जब आपके पास पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन बस ही नहीं हैं तो आप इस योजना को कैसे लागू करेंगे। 

दिल्ली में 20 हजार इलेक्ट्रिक बस की जरूरत
ज्योति पांडे लवकरे ने कहा कि हमें कम से कम 15,000 से 20,000 इलेक्ट्रिक बस की जरूरत है लेकिन हमारे पास कम हैं। प्रदूषण का समाधान अधिक इलेक्ट्रिक बस तैनात करने, नियमित अंतराल पर बस की उपलब्धता और दिल्ली मेट्रो की तरह स्टॉप पर बसों के आगमन का समय दिखाने वाली डिजिटल समय सारणी रखने में निहित है ताकि लोग तदनुसार योजना बना सकें।

वायु प्रदूषण में दो से तीन प्रतिशत की कमी
पर्यावरणविद् भवरीन कंधारी ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए और कहा कि ऐसे उपायों को एक सप्ताह के लिए लागू करने के बजाय, उन्हें पूरे वर्ष लागू किया जाना चाहिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पाया गया था कि जब जनवरी 2016 में पहली बार यह नियम लागू किया गया था, तब वायु प्रदूषण में केवल दो से तीन प्रतिशत की कमी आई थी।

केजरीवाल सरकार के फैसले की आलोचना
दिल्ली भाजपा ने ऑड-ईवन योजना लागू करने के केजरीवाल सरकार के फैसले की आलोचना की। भाजपा ने कहा कि केजरीवाल सरकार वायु प्रदूषण को रोकने में अपनी विफलता को छिपाने के लिए लोगों को सजा दे रही है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि ऑड-ईवन योजना की प्रभावशीलता की किसी भी शोध में पुष्टि नहीं हुई है। केजरीवाल सरकार इसे प्रचार स्टंट के रूप में लागू कर रही थी।

ऑड-ईवन के पीछे कोई वैज्ञानिक डेटा
सचदेवा ने दावा किया कि ऑड-ईवन योजना और चल रहे 'रेड लाइट ऑन इंजन ऑफ' अभियान दोनों में की प्रभावशीलता का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक डेटा नहीं है। पिछले वर्षों के दौरान जब भी यह योजना लागू की गई, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कोई गुणात्मक सुधार नहीं हुआ। इस तरह की 'नौटंकी' करने के बजाय बेहतर होगा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगाने और दिल्ली में सड़कों को धूल मुक्त बनाने के लिए काम करें।

ऑड-ईवन से कोई सुधार नहीं होगा : गोयल
पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का कहना है कि ऑड-ईवन से प्रदूषण स्तर पर कोई सुधार नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार सिर्फ दिखावे के तौर पर इसे लागू करने जा रही है। सरकार यह बताने से बच रही है कि आखिरकार उसने नौ साल में प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए। पंजाब में उनकी सरकार है तो फिर वहां पराली जलाने की लगातार घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। आखिरकार सरकार पूरी तरह से रोक लगाने में असफल क्यों रही। प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने 11 हजार बसों को शामिल करने की बात कही थी, लेकिन उनमें से कितने बसें आई। मेट्रो के कई प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं। इन सब मुद्दों पर सरकार बात करने से बच रही है। सिर्फ स्मॉग टावर समेत कुछ कामों को गिनाने की कोशिश की जाती है।

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