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Hindi News NCRअरुंधति के खिलाफ 1 हजार पेज की चार्जशीट, भड़काऊ भाषण मामले में पुलिस अगले हफ्ते कर सकती है दाखिल

अरुंधति के खिलाफ 1 हजार पेज की चार्जशीट, भड़काऊ भाषण मामले में पुलिस अगले हफ्ते कर सकती है दाखिल

FIR में देशद्रोह की धारा भी लगाई गई थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि SC ने 2022 में कहा था कि जब तक सरकार इसकी दोबारा जांच नहीं कर लेती, तब तक इस कानून के तहत कोई FIR नहीं की जा सकती।

अरुंधति के खिलाफ 1 हजार पेज की चार्जशीट, भड़काऊ भाषण मामले में पुलिस अगले हफ्ते कर सकती है दाखिल
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Sourabh JainPTI,नई दिल्लीTue, 18 Jun 2024 08:03 PM
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अतंर्राष्ट्रीय लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय और कश्मीर के एक पूर्व प्रोफेसर के कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में दिल्ली पुलिस अगले सप्ताह आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। बता दें कि यह मामला साल 2010 का है, जब नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इन दोनों ने कश्मीर को लेकर वह भड़काऊ भाषण दिया था।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एक हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट तैयार की है, जिसमें रॉय और हुसैन पर कई वीडियो और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस ने 6 से अधिक चश्मदीदों के बयानों का हवाला भी दिया है, साथ ही सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के जांच की फोरेंसिक रिपोर्ट भी पुलिस ने उपलब्ध कराई है। 

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को UAPA की धारा 45 (1) के तहत उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।  

अरुंधति रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन पर 21 अक्टूबर, 2010 को कोपरनिकस मार्ग स्थित LTG ऑडिटोरियम में 'आजादी - द ओनली वे' के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के लिए मामला दर्ज किया गया था।

इस मामले में नई दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद कश्मीर के एक सामाजिक कार्यकर्ता सुशील पंडित की शिकायत पर तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। बाद में मामले को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया था।

सम्मेलन में कही गई थीं ये सब बातें

बता दें कि 21 अक्टूबर 2010 को 'आजादी-द ओनली वे' के बैनर तले आयोजित इस सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, उनमें 'कश्मीर को भारत से अलग करने' का प्रचार किया गया था। इस मामले में 28 अक्टूबर 2010 को कश्मीर के रहने वाले सुशील पंडित द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि गिलानी और अरुंधति रॉय ने इस आयोजन में जोरदार तरीके से कहा था कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था और उस पर भारत के सशस्त्र बलों द्वारा जबरन कब्जा किया गया है, इसलिए भारत से जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। शिकायतकर्ता ने अदालत को इन बातों की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई थी।

इस कार्यक्रम में अरुंधति रॉय और शौकत हुसैन के अलावा जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और संसद पर हमले का आरोपी S.A.R. गिलानी भी मौजूद था।

इससे पहले इस मामले को लेकर पिछले अक्टूबर में L-G ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों के लिए CRPC की धारा 196 के तहत उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।

एक अधिकारी के अनुसार, FIR में 124-ए (देशद्रोह) की धारा भी लगाई गई थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में कहा था कि जब तक सरकार इसकी दोबारा जांच नहीं कर लेती, तब तक देशद्रोह कानून के तहत कोई FIR, जांच और दंडात्मक उपाय नहीं किए जा सकते।