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Hindi News NCR3500 में जनरल से OBC बनाने का खेल, दिल्ली पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार; 111 को जारी किए फर्जी सर्टिफिकेट

3500 में जनरल से OBC बनाने का खेल, दिल्ली पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार; 111 को जारी किए फर्जी सर्टिफिकेट

दिल्ली पुलिस ने एक गैंग का पर्दाफाश किया है जो चंद रुपयो में फर्जी जाति प्रमाणपत्र जारी करने का काम करता था। गैंग में तहसीलदार सहित चार लोग शामिल हैं। पुलिस ने सूचना के आधार पर जाल बिछाया।

3500 में जनरल से OBC बनाने का खेल, दिल्ली पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार; 111 को जारी किए फर्जी सर्टिफिकेट
fake caste certificate issuing gang busted by delhi police
Sneha Baluniएएनआई,नई दिल्लीFri, 14 Jun 2024 10:56 AM
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दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो चंद रुपयों में सामान्य श्रेणी (जनकल कैटेगरी) के व्यक्ति को अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग वाला सर्टिफिकेट जारी करते हैं। पुलिस ने गैंग में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें दिल्ली कैंट, राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार का एक तहसीलदार भी शामिल हैं। आरोपी 3500-3000 रुपए लेकर फर्जी जाति प्रमाणपत्र जारी करते थे।

पुलिस ने बिछाया जाल

पुलिस ने बताया कि उन्हें फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने और बांटने वाले गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। इसकी पुष्टि के लिए 13 मार्च 2024 को सामान्य वर्ग के एक फर्जी आवेदक को ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए संदिग्ध व्यक्ति के पास भेजा गया। 20 मार्च 2024 को एक और फर्जी ऑपरेशन किया गया, जिसमें सामान्य श्रेणी के दूसरे आवेदक ने 3,000 रुपये में ओबीसी प्रमाणपत्र हासिल कर लिया। दोनों भुगतान ऑनलाइन किए गए और लेन-देन की डिटेल्स रिकॉर्ड हो गईं।

ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां

इस सूचना के आधार पर पुलिस ने रैकेट में शामिल व्यक्तियों को पकड़ने के लिए एक पुलिस टीम बनाई। 9 मई, 2024 को संगम विहार निवासी 30 साल के सौरभ गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल फोन के डेटा से फर्जी आवेदकों के साथ चैट और विभिन्न दस्तावेजों के स्नैपशॉट का पता चला। गुप्ता ने दिल्ली कैंट में कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऑफिस के जरिए प्रमाण पत्र जारी करने की बात स्वीकार की। आगे की जांच में तीन और व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई: चेतन यादव, जो तहसीलदार के कार्यालय में काम करता था, वारिस अली, जो तहसीलदार नरेंद्र पाल सिंह का सिविलियन ड्राइवर  था और खुद नरेंद्र पाल सिंह। ये गिरफ्तारियां 14, 22 और 27 मई, 2024 को हुईं।

कैसे काम करता था गैंग

पुलिस के अनुसार, गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि जनवरी 2024 में उसकी मुलाकात चेतन यादव से हुई थी। वारिस अली के साथ मिलकर उन्होंने राजस्व विभाग से फर्जी प्रमाण पत्र जारी करके पैसे कमाने की योजना बनाई। गुप्ता फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करता और फिर यादव के साथ डिटेल्स और एप्लीकेशन नंबर शेयर करता और हर सर्टिफिकेट के पैसे ट्रांसफर करता था। यादव इन डिटेल्स को वारिस अली को भेजता था, जो आवेदनों को मंजूरी देने और वेबसाइट पर प्रमाण पत्र अपलोड करने के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट नरेंद्र पाल सिंह के डिजिटल साइन (डीएस) का उपयोग करता था। 

गिरोह ने फीस ली और कार्यकारी मजिस्ट्रेट को भुगतान सहित आपस में पैसे बांट लिए। पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव, डिजिटल साइन और 100 से अधिक कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र सहित महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं। आरोपियों द्वारा जारी किए गए 111 जाति प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता की जांच जारी है।