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200 वर्ष से अधिक पुरानी थी चूड़ीवालान की संगमरमर मस्जिद, आजादी की लड़ाई से जुड़ा है इतिहास

पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में सोमवार को संगमरमर मस्जिद की दीवारों में दरारें दिखने के कुछ ही मिनट बाद उसका एक हिस्सा ढह गया। क्या है इस संगमरमर मस्जिद का इतिहास जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट...

200 वर्ष से अधिक पुरानी थी चूड़ीवालान की संगमरमर मस्जिद, आजादी की लड़ाई से जुड़ा है इतिहास
Krishna Singhराहुल मानव,नई दिल्लीMon, 17 Jun 2024 11:24 PM
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पुरानी दिल्ली के चूड़ीवालान इलाके में सोमवार को संगमरमर नाम से मशहूर मस्जिद गिर गई। यह मस्जिद 200 वर्ष से अधिक पुरानी थी। इसका गुंबद बेहद खूबसूरत था। निगम के सीताराम बाजार वार्ड में स्थित इस मस्जिद में हर रोज काफी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आया करते थे। इसके रखरखाव व अन्य मरम्मत कार्यों के लिए स्थानीय लोग लगातार निधि का इंतजाम किया करते थे। स्थानीय लोग मस्जिद के गिरने के बाद उदासीन हैं। 

200 वर्ष से अधिक पुरानी मस्जिद
इतिहासकार फिरोज बख्त अहमद ने बताया कि संगमरमर मस्जिद चूड़ीवालान इलाके में काफी बड़ी मस्जिद थी। यह 200 वर्ष से अधिक पुरानी मस्जिद थी। इस जगह पर स्थित जामा मस्जिद के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद कही जाती थी। मस्जिद के पहले केयर टेकर व इमाम हाजी अब्दुल गयास सूफी थे। वह मस्जिद में नमाज पढ़ाया करते थे। वह अजमेर में स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़े हुए थे। इस मस्जिद में संगमरमर को गुजरात से लाया गया था। 
इसमें काफी बारीकी से काम किया गया था। 

क्रांति से जुड़ा है इतिहास
इसमें बेलगिरी फल के गूदा से संगमरमर के पत्थरों को जोड़ा गया था। यह मस्जिद काफी खूबसूरत थी। 1857 की देश की आजादी की क्रांति के समय मस्जिद में इसे लेकर बैठकें भी हुई थीं। स्वतंत्रता सेनानियों और स्थानीय लोगों ने भी तब बैठक में हिस्सा लिया था। उस समय देश को ही सर्वोपरि मानते हुए मस्जिद में बैठक में इसे लेकर चर्चा की जाती थी। इसके खिलाफ उस दौरान अंग्रेजों ने इस मस्जिद में तोड़फोड़ की थी।

ऐतिहासिक परंपरागत धरोहरों को किया जा रहा है संरक्षित
राजधानी की ऐतिहासिक परंपरागत धरोहरों को संरक्षित करते हुए उनको डिजिटल स्वरूप में ढाला जा रहा है। इसके मद्देनजर दिल्ली नगर निगम ने योजना बनाई है। जिसके तहत नागरिकों को राजधानी में मौजूद प्रत्येक पुरानी ऐतिहासिक इमारतों व उनसे जुड़े महत्व और इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके तहत, निगम 10 से अधिक 100 से ज्यादा पन्नों की किताब भी तैयार कर रहा है। निगम के विरासत संरक्षण कक्ष इस दिशा में पिछले चार वर्षों से अधिक समय से लगातार काम कर रहा है। 

ऐतिहासिक इमारतों के बारे में जुटाई जा रही जानकारी
विरासत संरक्षण कक्ष से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारी, सदस्य एवं कर्मचारी पूरी दिल्ली भर में एक-एक स्थान पर पहुंच रहे हैं। उन जगहों पर जाकर ऐतिहासिक इमारतों के बारे में सभी प्रकार की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक 500 से अधिक ऐतिहासिक धरोहरों को अपनी वेबसाइट में जानकारी साझा की है। निगम ने चार वॉल्यूम की किताबें भी डिजिटल स्वरूप में प्रदर्शित किया है, जिसमें लोगों को इन ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में विस्तृत तरीके से बताया गया है। 

डिजिटल स्वरूप में किताबें
अभी तक, चिराग दिल्ली की दक्षिणी एवं पूर्वी प्रवेशद्वार की दीवारें, दरियागंज में स्थित जैन मंदिर स्कूल, दक्षिण दरिया गंज में स्थित शहर की दीवार, अजीम गंज सराय, पश्चिमी निजामुद्दीन का प्रवेशद्वार, पश्चिमी निजामुद्दीन में स्थित शिव मंदिर, कालका मंदिर, कालकाजी में स्थित धर्मशाला जैसी ईमारतों के बारे में सूचना दी गई है। इसमें एक हजार वर्षों एवं इससे अधिक समयकाल की ईमारतों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की गई है। इस योजना के तहत निगम ने खुद इन इमारतों की हाई रोजोल्यूशन की तस्वीरें खींची हैं।

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