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Hindi News NCR'किसानों को खलनायक के रूप में पेश कर रहे', लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर SC नाराज;  केंद्र-राज्य को दी यह सलाह

'किसानों को खलनायक के रूप में पेश कर रहे', लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर SC नाराज;  केंद्र-राज्य को दी यह सलाह

दिल्ली एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि किसानों को खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि कुछ कठोर कदम उठाने की जरूरत है।

'किसानों को खलनायक के रूप में पेश कर रहे', लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर SC नाराज;  केंद्र-राज्य को दी यह सलाह
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 22 Nov 2023 05:31 AM
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दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुकने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसानों को खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। जस्टिस संजय किशन कौल और सुधांशू धूलिया की पीठ दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

कठोर कदम उठाने की जरूरत 

जस्टिस कौल ने कहा कि ‘मेरे विचार से पराली जलाने वाले किसानों से फसल एमएसपी के तहत कोई भी खरीदारी क्यों की जानी चाहिए, भले ही इसका लोगों, बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है? जस्टिस कौल ने यह भी सुझाव दिया कि जिन लोगों की पहचान पराली जलाने वालों के रूप में हुई है, उन्हें इस एमएसपी के अपने उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ कठोर कदम उठाने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया कि यह टिप्पणी किसी एक राज्य या दूसरे राज्य या केंद्र के बारे में नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य को अपनी राजनीति को किनारे करके इस समस्या के समाधान के लिए एकसाथ मिलकर काम करने को कहा है।

समय-सीमा तय करने का आदेश दें 

मामले की सुनवाई शुरू होने पर पंजाब सरकार के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने शीर्ष अदालत से इस समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई करने को समय-सीमा तय करने का आदेश देने का आग्रह किया, ताकि अगले सीजन की शुरुआत से घटना को रोका जा सके। सिंह ने पंजाब सरकार द्वारा राज्य में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

भूमि जोत के आकार में असमानता 

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि जोत के आकार में असमानता की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि बड़े किसानों को मशीनीकृत प्रक्रिया के माध्यम से पराली बेचकर लाभ हुआ, जबकि छोटे किसानों को बेलिंग मशीन खरीदने के लिए प्रारंभिक पूंजी निवेश करना मुश्किल हो गया। इस बारे में न्याय मित्र अपराजिता सिंह ने सवाल किया कि क्या पंजाब सरकार ने कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित किए हैं? इस पर पंजाब सरकार के महाधिवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को 80 फीसदी की सब्सिडी पर उपकरण मुहैया कराती है। 20 प्रतिशत भुगतान के अलावा, किसान को जनशक्ति और डीजल सहित परिचालन लागत वहन करना भी मुश्किल लगता है।

कहीं भी खुले में कूड़ा न जलाया जाए 

कोर्ट ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में खुले में कचरा जलाए जाने पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की और कचरा न जलाने के निर्देश दिए।

वैकल्पिक फसलों पर जोर देने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में भूजल के तेजी से गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताई। जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि किसानों को भी धान की फसल उगाने के परिणामों को समझना होगा या उन्हें समझाया जाना चाहिए। जस्टिस कौल ने कहा कि ‘यह कैसे होगा, इसका क्या गणित है, हमें नहीं पता क्योंकि हम विशेषज्ञ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जगह किसी वैकल्पिक फसल को उगाने को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

एमएसपी रोकना सुझाव, नीति खत्म नहीं हो सकती

जस्टिस धूलिया ने पराली जलाने वाले किसानों को धान की फसल उगाने पर रोक लगाने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यह एक सुझाव है क्योंकि एमएसपी नीति खत्म नहीं की जा सकती। यह एक संवेदनशील मुद्दा है। जस्टिस धूलिया ने कहा कि ऐसा लगता है कि किसानों को खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने के लिए किसानों के पास कोई मजबूरियां भी रही होंगी।
 

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