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अनुमान: दिल्ली-एनसीआर में इस बार कम सताएगी लू

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राजधानी को इस बार गर्मी के मौसम में लू का सामना कम करना पड़ेगा। नियमित अंतराल पर मानसून पूर्व की बारिश होने के चलते लोगों को बीच-बीच में भीषण गर्मी से निजात मिलती रहने की संभावना है। हालांकि, मानसून के दिल्ली पहुंचने में दस से ज्यादा दिनों की देरी हो सकती है।

मौसम पर निगरानी रखने वाली संस्था स्काईमेट ने बुधवार को इस मानसून सीजन के लिए मौसम का पूर्वानुमान जारी किया। स्काईमेट का अनुमान है कि इस बार देशभर में मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। जून से लेकर सितंबर महीने के बीच सामान्य से सात फीसदी तक कम बारिश हो सकती है। वहीं, दिल्ली में भी मानसून के देर से पहुंचने के आसार हैं। आमतौर पर दिल्ली में 28 जून तक मानसून पहुंच जाता है।

लेकिन, संस्था का अनुमान है कि इस बार मानसून के दिल्ली पहुंचने में दस दिन के लगभग की देरी हो सकती है। इससे पहले अगर मानसून पहुंचता भी है तो वह बेहद कमजोर होगा। जुलाई के मौसम में दिल्ली में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, अगस्त के महीने में इसकी कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। स्काईमेट के सीईओ जतिन सिंह के मुताबिक अल नीनो प्रभाव के चलते भारत के मानसून के प्रभावित होने के आसार हैं।

भीषण गर्मी से काफी हद तम राहत मिलेगी
स्काईमेट के वाइस प्रेसीडेंट महेश पालावत के मुताबिक दिल्ली में आमतौर पर अप्रैल के महीने में चार से पांच, मई के महीने में आठ से दस और जून के पहले पंद्रह दिनों में चार से पांच दिनों तक हीट वेव कंडीशन यानी लू जैसी स्थिति बनी रहती है। लेकिन, इस बार नियमित अंतराल में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्री मानसून बारिश की स्थिति बनी रहने की संभावना है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से काफी हद तक निजात मिलती रहेगी। भीषण गर्मी का दौर जैसे ही चार-पांच दिन तक चलेगा कि बारिश होने के आसार हैं। इसके चलते लोगों को लू और भीषण गर्मी से काफी हद तक राहत मिलेगी।

दिल्ली के मौसम पर भी पड़ा जलवायु परिवर्तन का असर
दिल्ली के मौसम में इस बार कई असामान्य परिवर्तन देखने को मिले हैं। राजधानी में इस बार सर्दी का मौसम ज्यादा समय तक खिंच गया। जनवरी, फरवरी और मार्च के महीने में लगभग बीस पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे हैं। इनकी सक्रियता से अच्छी बारिश हुई है, जिससे गर्मी का मौसम आने में देर हुई। इसके अलावा 7 फरवरी को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भारी ओलावृष्टि हुई। महेश पालावत का कहना है कि दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन या क्लाईमेट चेंज का असर दिल्ली के मौसम पर भी देखने को मिल रहा है। अतिशय ओलावृष्टि, जाड़े का लंबा खिंचना आदि भी इसी जलवायु परिवर्तन के अलग-अलग रूप हैं जो दिल्ली में देखने को मिल रहे हैं।

क्या है हीट वेव कंडीशन
यदि तापमान 40 डिग्री से ऊपर और सामान्य से चार से पांच डिग्री ज्यादा है तो उसे हीट वेव कंडीशन या लू कहा जाता है। जबकि, यदि तापमान 40 डिग्री से नीचे और सामान्य से छह डिग्री तक ज्यादा है तो उसे भी हीट वेव कंडीशन कहा जाता है।

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  • Web Title:Delhi NCR people will suffer less heat waves this year