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दिल्ली-NCR में बढ़ा गर्मी का सितम, हीटस्ट्रोक से बचने को इन बातों का रखें ध्यान; ऐसे रखें अपना ख्याल

दिल्ली-एनसीआर में तापमान बढ़ने के साथ ही हीटस्ट्रोक का भी खतरा बढ़ने लगा है। अस्पतालों की इमरजेंसी में हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीज भी आने लगे हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों को हीटस्ट्रोक का खतरा है।

दिल्ली-NCR में बढ़ा गर्मी का सितम, हीटस्ट्रोक से बचने को इन बातों का रखें ध्यान; ऐसे रखें अपना ख्याल
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 16 May 2024 05:53 AM
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दिल्ली में गर्मी से 15 मई तक ही अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहुंच चुका है। बढ़ते तापमान की वजह से लोगों में हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ने लगा है। अस्पतालों की इमरजेंसी में हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीज भी आने लगे हैं। डॉक्टरों को मानना है कि दोपहर के समय दोपहिया वाहन चालकों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा खतरा है। दिल्ली के चार बड़े अस्पतालों में पिछले कुछ दिन में आठ मरीज हीट स्ट्रोक के बाद इमरजेंसी में पहुंचे हैं। एम्स में चार, लोकनायक में दो और राम मनोहर लोहिया और सफदरजंग अस्पताल में एक-एक मरीज हीट स्ट्रोक के बाद भर्ती हुआ।

दोपहर में बाइक चलाने वाले अधिक

लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी विभाग की प्रमुख डॉक्टर रितु सक्सेना ने बताया कि अस्पताल में अभी तक दो मरीज हीट स्ट्रोक के लक्षणों के बाद इमरजेंसी पहुंचे हैं। आने वाले समय में तापमान बढ़ने पर लोगों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर में लंबे समय तक बाइक चलाने वालों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा खतरा होता है।

शरीर का तापमान बढ़ने लगता है

हीट स्ट्रोक शरीर की ऐसी स्थिति है, जिसमें शारीरिक तापमान सामान्य से अधिक होने लगता है। अधिकतर मामलों में यह 104 फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। ऐसे में शरीर खुद को ठंडा रखने में विफल होता है। यह स्थिति तब आती है, जब शरीर का थर्मल सिस्टम फेल हो जाता है। ऐसी स्थिति में थकान, उल्टी, चक्कर और पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

ज्यादा देर गर्मी में न रहें

हीट स्ट्रोक की स्थिति में आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है। हालांकि, गर्मी में बिना परिश्रम करने वाले लोगों को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है। यदि आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं और गर्मी में बैठे रहते हैं तो भी दिक्कत हो सकती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, मधुमेह आदि बीमारियों से पीड़ित रोगियों को इसका खतरा अधिक होता है।

ये हैं लक्षण

● शरीर का तापमान 104 डिग्री या इससे ज्यादा होना
● पसीना निकलना बंद हो जाना
● दिल की धड़कन तेज हो जाना
● दिमाग में गफलत, असंतुलन और दौरे की स्थिति

इन बातों का ध्यान रखें

● खुद को धूप से बचाने के लिए ढीले सूती कपड़े और टोपी पहनें। अगर आप बाहर जाते हैं तो कोशिश करें कि शाम तीन बजे के बाद या 11 बजे से पहले जाएं।
● कम से कम 8 से 9 ग्लास पानी पीना चाहिए। हालांकि दिल और किडनी की बीमारी है तो इस बारे में डॉक्टर से बात जरूर कर लें।
● बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों को अकेले न छोड़ें।

ये उपाय करें

● सभी पेय पदार्थ शरीर को तरल नहीं रखते। शराब या ज्यादा शुगर वाले पेय पदार्थ शरीर में डिहाइड्रेशन की वजह बन सकते हैं
● एक साथ ज्यादा भोजन न करें, छोटे-छोटे अंतराल पर पौष्टिक भोजन करें। हरी सब्जियों, सलाद और फलों को जरूर शामिल करें
● घरों में ठंडे कमरों से अचानक गर्मी में बाहर निकलने से पहले थोड़ी देर सामान्य तापमान में रुकें और फिर बाहर जाएं
● व्यायाम बेहद जरूरी है, लेकिन ध्यान रहे कि इतना ज्यादा पसीना न निकले कि शरीर बहुत गर्म होने लगे
● शरीर उच्च तापमान में ज्यादा परिश्रम से गर्म हो जाता है तो आपातकालीन उपचार लें

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