दिल्ली-एनसीआर में इस बार देखा गया सबसे गंभीर प्रदूषण, इन जगहों के हालात थे सबसे खरारब

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट का एक विश्लेषण बताता है कि पिछले साल की तुलना में दिल्ली एनसीएनसीआर ने इस बार की सर्दियों में गंभीर प्रदूषण दर्ज किया।  लॉकडाउन खत्म होने के बाद मिली छूट को इसका...

smog in delhi

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट का एक विश्लेषण बताता है कि पिछले साल की तुलना में दिल्ली एनसीएनसीआर ने इस बार की सर्दियों में गंभीर प्रदूषण दर्ज किया।  लॉकडाउन खत्म होने के बाद मिली छूट को इसका कारण देखा जा सकता है।इन सब में गाजियाबाज में प्रदषूण का स्तर सबसे ज्यादा था। दिल्ली की बात करें तो उत्तरी दिल्ली सर्वाधिक प्रदूषित रही। हालांकि हॉटस्पॉट रहे जहांगीरपुरी में पीएम 2.5 का स्तर पिछले साल तुलना में कम दर्ज किया। जहांगीर पुरी खराब हवा से साथ एक हॉटस्पॉट के रूप में उभरा।

इस साल की सर्दियों के दौरान लगातार दो स्मॉग एपिसोड देखे गए थे। पहला एपिसोड लंबा था  क्योंकि यह 3 नवंबर को शुरू हुआ था और सात दिनों तक चला था। दूसरा 22 दिसंबर से शुरू हुआ और तीन दिनों तक चला। इस तरह पिछले सर्दियों की तुलना में लगातार स्मॉग के एपिसोड कम थे।

2019-20 की सर्दियों में क्रमशः आठ, छह और पांच-दिन की अवधि के तीन स्मॉग एपिसोड थे; 2018-19 की सर्दियों में 10 दिनों के चार स्मॉग एपिसोड, छह दिनों के दो एपिसोड और तीन दिनों की अवधि में से एक था।


सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी (अनुसंधान और वकालत) कहती हैं,  सर्दियों के प्रदूषण के रुझानों को समझना हमेशा रोचक होता है, इस साल तो महामारी के कारण असाधारण स्थिति मिली है-  साथ ही इस साल सर्दियों में मौसम के सबसे विपरीत शांत हवा और ठंडे  के कारण कठिन मौसम बना हुआ था।

उन्होंने कहा, "सर्दियों की हवा स्थानीय और क्षेत्रीय प्रदूषकों को फँसाती है और सर्दियों की घातक धुंध को जन्म देती है, जिससे हम दिल्ली-एनसीआर के निवासी बहुत परिचित हैं।

रुझानों से पता चलता है कि पीएम 2.5 के "गंभीर" और "बहुत खराब" स्तरों के साथ दिनों की संख्या (2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाला कण) इस सर्दी में अपेक्षाकृत कम थी।

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के अनुसार, यह आपातकालीन उपायों का एक सेट है, जिसमें पीएम के स्तर को एक निश्चित निशान तक पहुंचने के लिए किक किया जाता है, हवा की गुणवत्ता को 'गंभीर' क्षेत्र में माना जाता है जब पीएम 2.5 का स्तर 250 ग्राम से ऊपर होता है या / m3 या PM 10 का स्तर (10 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाला पार्टिकुलेट मैटर) 430ug / m3 से ऊपर है। इसे ’खराब’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है जब पीएम 2.5 का स्तर 91ug / m3 और 120ug / m3 के बीच होता है या PM 10 का स्तर 251ug / m3 और 350ug / m3 के बीच होता है।

256μg / m3 के मौसमी औसत के साथ जहाँगीरपुरी, गर्म स्थानों के बीच सबसे गंदा था। बहादुरगढ़ - जिसने अपने PM2.5 स्तर में लगभग 50% स्पाइक दर्ज किया - सबसे साफ था।

निष्कर्षों से यह भी पता चला है कि राजधानी में कई स्थानों पर खड़ी गिरावट को नोट किया गया था जो अभी तक प्रदूषण निगरानी एजेंसियों द्वारा 'हॉट स्पॉट' के रूप में नामित नहीं हैं।

सर्दियों के महीनों के दौरान, कम से कम 14 और स्थानों ने मान्यता प्राप्त हॉट स्पॉट (197μg / m3) की तुलना में उच्च मौसमी औसत दर्ज किया। ये थे अलीपुर, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू), आईटीओ, नेहरू नगर, पटपड़गंज, सोनिया विहार और विवेक विहार दिल्ली में, सेक्टर -1 और 116 नोएडा में, लोनी, संजय विहार और इंदिरापुरम गाजियाबाद में, ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क, और बुलंदशहर।

Nootan Vaindel

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