चार दिन लगातार 'गंभीर', रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा दिल्ली का पलूशन, नहीं दिख रहा सलूशन
दिल्ली की हवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ने से दिल्ली अब एक गैस चैंबर जैसी बनती जा रही है। रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 'बेहद गंभीर-प्लस' श्रेणी के उच्च अंत 454 तक गिर गया, जो देश में सबसे अधिक है।

राजधानी दिल्ली की हवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ने से दिल्ली अब एक गैस चैंबर जैसी बनती जा रही है। रविवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'बेहद गंभीर-प्लस' श्रेणी के उच्च अंत 454 तक गिर गया, जो देश में सबसे अधिक है। दिल्ली को वायु-गुणवत्ता निगरानी वेबसाइट (आईक्यूएयर) में रविवार को दुनिया की सबसे खराब हवा वाले शहर के रूप में दर्शाया गया।
पूर्वानुमान के अनुसार, खराब हवा के दिनों का सिलसिला अभी आगे भी जारी रहने की संभावना है और यह 2016 और 2017 में लगातार सात दिनों की गंभीर वायु के नवंबर रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकता है। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रैप चरण-4 उपायों को लागू कर दिया है, जिसमें गैर-आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ''दिल्ली में रविवार को लगातार चौथे दिन एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज किया गया और कम से कम अगले दो दिनों तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है। यह राजधानी में इस तरह की सबसे लंबी अवधि में से एक हो सकता है। पिछली ऐसी घटनाएं नवंबर 2017 और 2016 में सात-सात दिनों तक चली थीं। दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, 8 नवंबर तक हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रहने की संभावना है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि गुरुवार को शाम 4 बजे समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 392 था, लेकिन सुबह 5 बजे यह 402 की रीडिंग के साथ 'गंभीर' श्रेणी में और खराब हो गया। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को एक्यूआई था क्रमशः 468, 415 और 454 था।
पिछले वर्षों में गंभीर दिनों के अध्ययन से पता चलता है कि नवंबर 2022 में तीन ऐसे दिन देखे गए जिनमें 3 और 4 नवंबर को लगातार दो गंभीर वायु गुणवत्ता वाले दिन थे,। जबकि पिछले साल दिसंबर में ऐसे दो दिन थे जब AQI 400 अंक को पार कर गया था, जनवरी 2023 में ऐसे तीन दिन देखे गए। हालांकि, नवंबर 2021 सबसे प्रदूषित था क्योंकि सीपीसीबी द्वारा अप्रैल 2015 से AQI को मापना शुरू करने के बाद से वर्ष के अंतिम महीने में 11 सबसे अधिक गंभीर दिन दर्ज किए गए थे। इन 11 दिनों में से, तीन गंभीर श्रेणी वाले दिनों के दो दौर दर्ज किए गए।
नवंबर 2020 में देखे गए नौ गंभीर दिनों में से AQI लगातार छह दिनों तक 400 से ऊपर रहा। नवंबर 2019 और 2018 में क्रमशः लगातार चार और तीन गंभीर दिनों का दौर दर्ज किया गया। लगातार सात गंभीर दिनों की सबसे लंबी अवधि नवंबर 2016 और 2017 में दर्ज की गई थी, लेकिन नवंबर 2015 में लगातार केवल तीन गंभीर दिन दर्ज किए गए।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक, अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, "इस तरह के लंबे समय तक चलने वाले स्मॉग के गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं। हालांकि, हम मौसम विज्ञान के बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं, हम निश्चित रूप से बहुत दृढ़ और आक्रामक कदम उठा सकते हैं। ताकि धुंध को उड़ाने के लिए हवा न होने पर प्रदूषण को और बढ़ने से रोका जा सके।”
उन्होंने कहा कि इसका वास्तविक समाधान तभी सामने आएगा, जब दिल्ली-एनसीआर वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने और सभी प्रमुख स्रोतों से प्रदूषण में कटौती करने के लिए साल भर प्रयास करेगा।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, “हानिकारक प्रदूषण का प्रभाव अस्पतालों में कतारों में दिखाई दे रहा है और लोग सांस संबंधी समस्याओं की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल उत्पन्न हो गया है और कमजोर आबादी पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है।”


