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29 अक्तूबर, 2020|9:50|IST

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प्रदूषण से निपटने में दिल्ली के मंसूबों पर पानी फेर रहा पंजाब, किसान बोले- हम पराली जलाने को मजबूर

punjab  farmers continue to burn stubble in their fields in gehri mandi village of amritsar district

दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों छाई धुंध ने तमाम तरह के प्रदूषण को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है। राजधानी और आसपास के इलाकों में दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करते जा रहे प्रदूषण के बीच पंजाब में पराली जलने का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है और यहां के किसान प्रदूषण से निजात पाने के दिल्ली सरकार के इंतजामों और मंसूबों पर पानी फेरने में लगे हुए हैं। 

अमृतसर से लेकर मोहाली तक कई जगहों पर किसानों ने आज भी अपने खेतों में पराली जलाई। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस दौरान अमृतसर के गहरी मंडी गांव के एक किसान ने कहा कि हम पराली को जलाने के लिए मजबूर हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद, हमें सरकार द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया है। हमारे पास मशीनरी और ट्रैक्टर खरीदने के लिए 10 लाख रुपये नहीं हैं। 

किसान ने कहा कि हम भी पराली जलाना नहीं चाहते, लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार हमारी कोई मदद नहीं कर रही है। हम खुद पराली को लेकर परेशान काफी हैं। 

यूपी, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से रोकने को SC ने बनाई कमेटी

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कारण बनी पराली को जलाने पर रोक संबंधी कदमों की निगरानी के लिए शुक्रवार को अपने एक पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर का एक सदस्यीय कमेटी गठित की है। लोकुर कमेटी पराली जलाए जाने की घटनाओं संबंधी अपनी रिपोर्ट दशहरा की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली और पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के सभी अधिकारी जस्टिस लोकुर कमेटी को रिपोर्ट करेंगे।

 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने में लोकुर कमेटी की मदद के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), भारत स्काउट्स और गाइड्स और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) को भी उन क्षेत्रों तैनात किया जाए। ये मोबाइल टीमें खेतों में आग लगने की सूचना देंगी जिसके आधार पर अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को उन खेतों की निगरानी में लोकुर कमेटी की मदद करने का निर्देश दिया जिनमें पराली जलाई जाती है। कोर्ट ने कमेटी को सभी सहायता प्रदान करने और बुनियादी ढांचे, परिवहन और मोबाइल टीमों की सुरक्षा की व्यवस्था करने के लिए कहा है। 

दिल्ली-एनसीआर को इस साल प्रदूषण में राहत की उम्मीद 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के मोटे तौर पर तीन कारक हैं- मौसम संबंधी कारक, क्षेत्रीय कारक जैसे कि पराली जलाना और स्थानीय कारक। CPCB ने कहा कि दिल्ली में मौसम की स्थिति इस साल सितंबर के बाद से प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहद प्रतिकूल है।

CPCB  के अध्यक्ष शिव दास मीणा ने दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ सालों में प्रदूषण के स्तर में गिरावट देखी गई है। मीणा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में गैर-बासमती धान का रकबा कम रहने से दिल्ली-एनसीआर को इस साल प्रदूषण में राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि गैर-बासमती धान की पराली के निपटारे में ही किसानों को समस्या आती है और वे उसे खेत में ही जला देते हैं। पंजाब में पिछले साल 22.91 लाख हेक्टेयर में धान की फसल हुई थी, जबकि इस साल इसका रकबा घटकर 20.76 लाख हेक्टेयर है। इसी प्रकार हरियाणा में गैर-बासमती धान का रकबा पिछले साल के 6.48 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस साल 4.27 लाख हेक्टेयर रहा है। इससे पराली जलाने की घटनाओं में कमी की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि ठंड के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में हर साल होने वाले प्रदूषण में आसपास के राज्यों में जलाई जाने वाली पराली का योगदान 4 से 40 प्रतिशत के बीच होता है। सितंबर और अक्टूबर के महीने में अब तक पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले वृद्धि के बारे में श्री मीणा ने कहा कि इस साल फसल कटाई जल्दी होने के कारण ऐसा हुआ है। उम्मीद है कि पूरे मौसम में ऐसी घटनाओं में कमी आएगी। 

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  • Web Title:Delhi-NCR AQI Parali Delhi air pollution : Punjab farmers said we are forced to burn stubble