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दिल्ली में एक और घोटाले पर एलजी वीके सक्सेना का ऐक्शन, एजेंसी से जांच की मांग, गृह मंत्रालय को पत्र

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 2017-2019 के दौरान शिक्षण संकायों में भर्ती से जुड़े एक कथित घोटाले की जांच किसी एजेंसी से कराए जाने की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है।

दिल्ली में एक और घोटाले पर एलजी वीके सक्सेना का ऐक्शन, एजेंसी से जांच की मांग, गृह मंत्रालय को पत्र
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीSat, 17 Feb 2024 11:15 PM
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उपराज्यपाल वीके सक्सेना (Lieutenant Governor VK Saxena) ने 2017-2019 के दौरान शिक्षण संकायों में भर्ती से जुड़े एक कथित घोटाले के संबंध में दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (DPSRU) के कुलपति रमेश गोयल को हटाने का आदेश दिया है। राज निवास के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि एलजी वीके सक्सेना ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर हरविंदर पोपली (Harvinder Popli) को भी हटाने की मंजूरी दी है। साथ ही कथित घोटाले की बाहरी एजेंसी से जांच कराए जाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा है।

राज निवास के अधिकारियों ने बताया कि एक जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने कहा कि जांच में भर्ती प्रक्रिया में घोर अनियमितताएं पाई गई थीं। दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति वीके सक्सेना ने घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर रमेश गोयल और छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को भी मंजूरी प्रदान की है। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में इन अधिकारियों के नामों का उल्लेख किया गया है।

जांच रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि 2017 और 2019 में डीपीएसआरयू (Delhi Pharmaceutical Sciences and Research University, DPSRU) में शिक्षण संकायों की भर्ती में अनियमितताएं, अवैध गतिविधियां और पक्षपात के आरोप सही पाए गए। एलजी वीके सक्सेना ने सलाहकार (भर्ती) आरपी शर्मा के खिलाफ कार्रवाई और अवैध रूप से चयनित विश्वविद्यालय के 17 संकाय सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के भी निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों ने कहा कि समिति ने यह भी पाया कि रमेश गोयल ने उन्हें जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में अपना पक्ष दिया, लेकिन रिपोर्ट में सूचीबद्ध प्रमुख अनियमितताओं का जवाब नहीं दिया। एलजी ने एक नोट में कहा कि रिपोर्ट, गोयल के जवाब और प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा निदेशालय की टिप्पणियों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, उन्होंने पाया कि यह स्थापित करने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं कि कुलपति अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे। 

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