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घटता जा रहा भूजल, हम धरती मां के साथ कर रहे अन्याय; दिल्ली एलजी ने लोगों से की एक अपील

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने घटते भूजल पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने इस स्थिति को सभी के लिए 'चिंताजनक' बताया है। एलजी ने लोगों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने को कहा।

घटता जा रहा भूजल, हम धरती मां के साथ कर रहे अन्याय; दिल्ली एलजी ने लोगों से की एक अपील
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Sneha Baluniएएनआई,नई दिल्लीThu, 20 Jun 2024 11:53 AM
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दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने घटते जल स्तर पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इस स्थिति को सभी के लिए 'चिंताजनक' बताया और कहा कि इससे पता चलता है कि हम 'धरती माता' के साथ अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में हिस्सा लेने और एक पौधा लगाने का भी आग्रह किया। एलजी वीके सक्सेना और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एलजी सक्सेना ने कहा, 'पिछले एक महीने से दिल्ली और पूरा देश भीषण गर्मी झेल रहा है। हम इसे झेलने को मजबूर हैं। दिल्ली में तापमान 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भूजल स्तर दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है। यह हम सभी के लिए चिंताजनक स्थिति है। इससे पता चलता है कि हम धरती मां के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। इसलिए मैं सभी से अपील करता हूं कि वे इस अभियान (एक पेड़ मां के नाम) का हिस्सा बनें और एक पौधा लगाएं। आपको सिर्फ पौधा लगाकर और उसके साथ फोटो खिंचवाकर अपने अभियान को खत्म नहीं करना है। आपको उस पेड़ की जिम्मेदारी इस सोच के साथ लेनी है कि भविष्य में यह आपकी पहचान बनेगा। जब कोई व्यक्ति इसकी छाया में बैठेगा, तो वह आपको इसके लिए धन्यवाद देगा।'

उन्होंने आगे बताया कि पौधों को काले प्लास्टिक में रखने की बजाय, पौधों को गाय के गोबर के छोटे गमलों में रखा जाए क्योंकि उपयोग के बाद प्लास्टिक पर्यावरण को प्रभावित करता है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने कहा, 'हम पौधे लगाते हैं, लेकिन वे काले प्लास्टिक के कवर में आते हैं। रोपण के बाद, उन्हें (काले प्लास्टिक को) जंगलों में फेंक दिया जाता है और फिर वे नदियों और नालों में चले जाते हैं। जिससे उनका दम घुटता है। हमने इस दिशा में एक पहल की है। अब प्लास्टिक के बजाय, गाय के गोबर के छोटे गमले बनाए जाएंगे और उनमें पौधे रखे जाएंगे। फिर उन पौधों को लगाया जाएगा।'