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दिल्ली जल बोर्ड ऑडिट: पैसे का दुरुपयोग, खातों मे गड़बड़ी; कैग को क्या-क्या मिला

दिल्ली जल बोर्ड की कैग रिपोर्ट में कई अनियमितताएं मिली है। रिपोर्ट को दिल्ली सरकार के साथ शेयर किया गया है। हालांकि अभी तक इसे विधानसभा में पेश नहीं किया गया। खातों में गड़बड़ी मिली है।

दिल्ली जल बोर्ड ऑडिट: पैसे का दुरुपयोग, खातों मे गड़बड़ी; कैग को क्या-क्या मिला
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 15 Feb 2024 02:45 PM
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट 2017-18 में दिल्ली जल बोर्ड के खातों में कथित अनियमितताओं को उजागर किया गया है। इस रिपोर्ट को दिल्ली सरकार के साथ शेयर किया गया है, लेकिन अभी तक विधान सभा में पेश नहीं किया। माना जा रहा है कि इसमें बोर्ड ने अपने खर्च को कम करके दिखाया है, जिससे काफी नुकसान हुआ है।

इसे राजस्व सेक्शन द्वारा दिए गए आंकड़ों एवं थोक और खुदरा पानी के बकाया के खातों में विसंगति से समझा जा सकता है। ऐसा पता चला है कि रिपोर्ट में जहां राजस्व सेक्सन ने बकाए को लगभग 9,000 करोड़ रुपये के रूप में लिस्ट किया है, वहीं बोर्ड के खातों में यह आंकड़ा लगभग 2,800 करोड़ रुपये है- यानी इसमें 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का अंतर है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वित्त विभाग द्वारा जल उपयोगिता में पैसे के मिसमैनेजमेंट को लेकर चिंता जताए जाने के बाद, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले साल दिसंबर में पिछले 15 सालों के कैग ऑडिट का आदेश दिया था। हालांकि, उनके अनुरोध को एलजी वीके सक्सेना ने खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा कि 2017-18 की रिपोर्ट को पहले विधानसभा में पेश किया जाना चाहिए।

अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट में करेंट (चालू) खातों के बारे में भी बात की गई है और उल्लेख किया है कि बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय विवरण के अनुसार शेष राशि के बीच 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का अंतर है। अधिकारी ने कहा, 'ये दोनों आंकड़े ओवरड्राफ्ट में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विसंगति धोखाधड़ी या धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।' सूत्रों ने कहा कि हर महीने हर घर को 20 किलोलीटर तक मुफ्त पानी उपलब्ध कराने की दिल्ली की प्रमुख योजना का भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।

एक अधिकारी ने कहा, 'डीजेबी को जहां सब्सिडी के तौर पर लगभग 425 करोड़ रुपये का मुआवजा अनुदान प्राप्त हुआ। वहीं रिकॉर्ड बताते हैं कि 400 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। लेकिन यह आय और व्यय खाते में नहीं दिखती। इसके कारणों का खुलासा नहीं किया गया है।' सूत्रों से पता चला है कि रिपोर्ट में एक और कथित अनियमितता विज्ञापनों पर हुए खर्च को लेकर बताई गई है।

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