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दिल्ली में 440 जगहों पर गरजे बुलडोजर, अवैध निर्माण किए ध्वस्त, 85 इमारतें सील

दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी की ओर से दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ 440 जगहों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। एमसीडी की ओर से 85 जगहों पर संपत्ति को सील भी किया गया है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

दिल्ली में 440 जगहों पर गरजे बुलडोजर, अवैध निर्माण किए ध्वस्त, 85 इमारतें सील
Krishna Singhराहुल मानव,नई दिल्लीWed, 31 Jan 2024 12:07 AM
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दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम ने जनवरी माह में 440 जगहों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। साथ ही 85 जगहों पर संपत्ति को सील भी किया है। इसके अतिरिक्त अवैध रूप से 35 जगहों पर प्लॉटों की चारदीवारी को भी ध्वस्त किया है। निगम के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवैध निर्माण के खिलाफ तीन कानून के तहत कार्रवाई की है। इसमें मास्टर प्लान 2021, भवन निर्माण के नियमों और निगम अधिनियम का उल्लंघन करने की वजह से विभिन्न जगहों पर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया है। इसमें निजी कृषि भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए प्लॉटों और सड़कों को भी गिराया गया है। इसके अलावा 70 एकड़ निजी कृषि भूमि को भी अवैध निर्माण से मुक्त कराया गया। 

अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में अवैध तरह से निर्माण करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके संबंध में नियमों निगम की टीमें लगातार सभी जोन में निरीक्षण कर रही हैं। निगम के संज्ञान में आया है कि आसानी से बिजली पानी के कनेक्शन उपलब्ध होने के कारण अवैध निर्माण व प्लॉट में अवैध रूप से चारदीवारी हो रही है। इसलिए दिल्ली जल बोर्ड व बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर जनवरी माह में कार्रवाई की है। इन विभागों से तुरंत प्रभाव से अवैध रूप से निर्माण करने वाली जगहों से बिजली व पानी के कनेक्शन काटने के लिए संपर्क किया है। उन्हें अवैध निर्माण के बारे में सूचना भी दे रहे हैं। जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा न मिले। 

बिल्डरों से वापस दिलाई जाए रकम
निगम की कार्रवाई पर पीड़ितों ने सवाल भी खड़े किए हैं। पीड़ित लोगों ने कहा कि सभी एजेंसियों को तालमेल बैठाकर अवैध रूप से निर्माण कर संपत्ति व प्लॉट को बेचने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही रकम को भी वापस दिलवाना चाहिए। पीड़ित प्रीति ने कहा कि अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों से जिन्होंने संपत्ति व प्लॉट खरीदा है। वहां पर निगम ने नियम का हवाला देते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया है। इसलिए जितनी रकम लोगों ने खर्च की है। उसे वापस बिल्डरों से एजेंसियों व विभागों को दिलवाना चाहिए। इसमें जनप्रतिनिधियों को भी लोगों की आवाज को सुनकर उचित कदम उठाना चाहिए।

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