DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दिल्ली होटल अग्निकांड: स्पेशल प्रोविजन एक्ट की आड़ में जमकर हुआ अवैध निर्माण

Hotel Arpit Palace

करोलबाग के जिस अर्पित होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हुई, वहां जमकर नियमों उल्लंघन किया जा रहा था। बीते 25 वर्षों में निगम की ओर से होटल को पांच बार अवैध निर्माण की वजह से सीलिंग और डेमोलिशन (तोड़-फोड़) के लिए बुक किया गया था, लेकिन स्पेशल प्रोविजन एक्ट के चलते इमारत पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इमारत को अवैध निर्माण में बुक होने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इलाके की कई अन्य इमारतों में भी जमकर अवैध निर्माण किया जा चुका है, लेकिन स्पेशल प्रोविजन एक्ट के चलते निगम अधिकारियों की ओर से यहां की इमारतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक, जब से दिल्ली में स्पेशल प्रोविजन एक्ट लागू हुआ है, तब से अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई है। नेता और अधिकारी हर तीन साल में इस कानून की मियाद बढ़ा देते हैं और इस दौरान हुए अवैध निर्माण को संजीवनी मिल जाती है। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली के तीनों नगर निगमों को प्रतिमाह हजारों की संख्या में अवैध निर्माण की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन कार्रवाई कुछ ही पर हो पाती है।

क्या है दिल्ली का स्पेशल प्रोविजन एक्ट 2006
राजधानी को सीलिंग और तोड़फोड़ से बचाने के लिए वर्ष 2008 में स्पेशल प्रोविजन एक्ट लाकर वर्ष 2006 तक हुए निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया गया था। पहले इस कानून को एक-एक साल के लिए और वर्ष 2011 में तीन साल के लिए बढ़ाया गया था। वहीं, वर्ष 2011 के बाद भी इस कानून की मियाद हर बार तीन-तीन साल के लिए बढ़ा दी गई है। वर्ष 2011 के बाद इसे बढ़ाकर 2014 तक बढ़ाया गया, वर्ष 2014 के बाद इसे वर्ष 2017 तक बढ़ाया गया और वर्ष 2017 के बाद इसे अब वर्ष 2020 तक बढ़ा दिया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Delhi Hotel Fire Illegal construction under the provisions of the Special Provisioning Act in Hotel Arpit Palace