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दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को भंग करने की चेतावनी दी, कहा- विकास कार्यों की उम्मीद कैसे करें?

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को एमसीडी की की जमकर खिंचाई की। अदालत ने कहा कि निगम का व्यवहार निराशाजनक है। हम निकाय को भंग करने के निर्देश दे सकते हैं। क्या है मामला जानें...

दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को भंग करने की चेतावनी दी, कहा- विकास कार्यों की उम्मीद कैसे करें?
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीSat, 02 Mar 2024 01:35 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कर्मचारियों को वेतन भुगतान में देरी और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में विफल रहने पर शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम (Municipal Corporation of Delhi, MCD) की खिंचाई की। उच्च न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि वेतन-भत्ते नहीं दिए गए तो नगर निकाय को भंग करने के निर्देश दे सकते हैं। अदालत ने कहा कि जब अब कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर सकते तो आप से विकासकार्यों की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल 
वेतन और पेंशन का भुगतान न करने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की पीठ ने सवाल किया कि क्या कोई इकाई जो अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भुगतान करने में असमर्थ है, क्या वह कोई विकास कार्य कर सकती है ? अदालत ने इसके लिए निगम को जवाब दाखिल करने को कहा गया है। पीठ ने यह भी कहा कि निगम का व्यवहार निराशाजनक है।

विकास कार्य की उम्मीद कैसे करें 
पीठ ने कहा कि यदि आप वेतन नहीं दे सकते, सातवां वेतन आयोग लागू नहीं कर सकते, तो आपसे विकास कार्य करने की उम्मीद कैसे की जाती है। पीठ ने कहा कि इस स्थिति में कौन सा ठेकेदार आपके साथ काम करेगा। उधर, एमसीडी के वकील ने कहा कि निगम के एकीकरण के बाद स्थितियों में सुधार हुआ है। जनवरी महीने तक का वेतन और पेंशन का भुगतान किया गया है। 

नहीं तो अन्य विकल्प पर करेंगे विचार
इस पर पीठ ने कहा कि वह इससे बेहतर प्रणाली का इस्तेमाल कर सकते हैं। एमसीडी अपने कर्मचारियों को समय से वेतन दे और सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करे नहीं तो अन्य विकल्प पर विचार किया जाएगा। विकल्प के तौर पर निगम को भंग भी किया जा सकता है। इससे पहले निगम अपना पक्ष रखे।

आप दान नहीं कर रहे, ये उनका वैधानिक हक
यह देखते हुए कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा दायर मामलों का बैच सात वर्षों से लंबित है, अदालत ने कहा- एमसीडी गरीब लोगों को निशाना नहीं बना सकती है। आप 10 दिन के भीतर फरवरी महीने का बकाया भुगतान करिए। आपको लगता है, जैसे कि यह कोई दान-पुण्य है जो आप कर रहे हैं। ये वैधानिक बकाया हैं। वे हर महीने नहीं आ सकते। आपको समय पर भुगतान करना होगा। यह इस तरह से लंबित नहीं रह सकता है।

अब तो दिल्ली सरकार-MCD सेम पेज पर
अदालत ने कहा- अपने आप को वित्तीय रूप से योग्य बनाएं। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो आपको रहने का औचित्य नहीं है। इससे कुछ बेहतर प्रणाली सामने आनी चाहिए। कानून ने केंद्र को एमसीडी को भंग करने का अधिकार दिया है। अब दिल्ली सरकार और एमसीडी एक ही पेज पर हैं, इसलिए निगम के वित्तीय मामलों को व्यवस्थित किया जाना चाहिए।

आप कहते हैं कि भुगतान नहीं करेंगे...
अदालत ने कहा- आप कहते हैं कि भुगतान नहीं करेंगे, केंद्र को भुगतान करना होगा। ये आतंकवादी समूह के कब्जे वाले लोग नहीं हैं। इसके बाद एमसीडी के वकील ने कहा- अदालत विवादों को सुलझाने के लिए हितधारकों की एक बैठक का निर्देश देना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि आप खुद बैठक तय करिए। साथ ही अदालत ने सातवें वेतन आयोग के बकाया के भुगतान के मुद्दे को हल करने के लिए मोहलत भी दी।

सख्त चेतावनी, केंद्र को बोलकर भंग करा देंगे
अदालत ने एमसीडी को चेतावनी देते हुए कहा- या तो अपने विवाद सुलझाएं या हमें केंद्र को बताना होगा कि आपको भंग करने की जरूरत है। यदि आप अपना घर व्यवस्थित करने के इच्छुक नहीं हैं, तो हम घर बंद कर देंगे। अक्षम लोगों को बता देना चाहते हैं कि उनके लिए कोई गुंजाइश नहीं है। आप अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार के कारण मुकदमेबाजी पैदा करते हैं।

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