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Hindi News NCR'आपका सिस्टम सरकारी विभाग से भी बदतर', फेसबुक-इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी पर भड़का दिल्ली हाईकोर्ट

'आपका सिस्टम सरकारी विभाग से भी बदतर', फेसबुक-इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी पर भड़का दिल्ली हाईकोर्ट

मेटा के वकील ने कोर्ट से कहा कि इंस्टाग्राम पेज को तीन कॉपीराइट शिकायतों के बाद ब्लॉक कर दिया गया था और मीडिया समूह ने कहा कि ईमेल शिकायत को अस्वीकार नहीं किया था बल्कि वह एक ऑटोमैटिक उत्तर था।

'आपका सिस्टम सरकारी विभाग से भी बदतर', फेसबुक-इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी पर भड़का दिल्ली हाईकोर्ट
Sourabh JainPTI,नई दिल्लीTue, 30 Apr 2024 08:14 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पेरेंट कम्पनी मेटा को लेकर मंगलवार को कड़ी टिप्पणी की और कहा कि इसकी कार्यप्रणाली किसी सरकारी विभाग से भी बदतर है। हाईकोर्ट ने यह बात एक मीडिया हाउस की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। कोर्ट ने कहा कि मीडिया हाउस टीवी टुडे नेटवर्क के ब्रांड हार्पर बाजार इंडिया के इंस्टाग्राम पेज को ब्लॉक करने को लेकर मेटा कम्पनी उचित जवाब देने में विफल रही है। 

टेक जगत की दिग्गज कम्पनी मेटा की खिंचाई करते हुए कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि अगर मीडिया हाउस की शिकायत पर फैसला नहीं किया जाता है, तो अदालत प्रथम दृष्टया यही मानेगी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टीवी टुडे के वकील को घूमा रहा था। 

मीडिया हाउस टीवी टुडे नेटवर्क ने किसी तीसरे पक्ष द्वारा कॉपीराइट एक्ट उल्लंघन की शिकायत के बाद अपना इंस्टाग्राम पेज ब्लॉक करने को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है, इसी की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेटा की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई। 

कोर्ट ने कहा, 'आप किसी सरकारी विभाग से भी बदतर हैं। कृपया सावधान रहिए। आपको इस स्थिति में एक्टिव रहना होगा। आपका सिस्टम काम नहीं कर रहा है, आपका सिस्टम काम नहीं करता है, इसे काम करना ही होगा।' कोर्ट ने आगे कहा कि मेटा को अपना घर व्यवस्थित करना चाहिए, अन्यथा अदालत उसकी निंदा करने का आदेश पारित कर सकती है।'

इस याचिका में इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के नियम 3(1)(सी) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी गई है।

मीडिया हाउस के वकील ने कोर्ट से कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत के बारे में मेटा को लिखा और शिकायत निवारण अधिकारी से भी सम्पर्क किया,लेकिन उन्हें केवल यही जवाब मिला कि आपने सही जगह सम्पर्क नहीं किया है। वकील ने कोर्ट के सामने मेटा को लिखे गए उन ईमेल्स को भी रखा।


मेटा की तरफ से पक्ष रखते हुए उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि कॉपीराइट से जुड़ी तीन शिकायतों के बाद उनके इंस्टाग्राम पेज को ब्लॉक कर दिया गया था। साथ ही कहा कि मीडिया हाउस द्वारा दिखाया जा रहा ईमेल शिकायत को हल करने से मना करने का फैसला नहीं था बल्कि सॉफ्टवेयर द्वारा दिया गया ऑटोमैटिक जवाब था। 

इस बात पर भड़का कोर्ट

मेटा के वकील की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से मेटा के वकील की मौजूदगी में जरूरी शिकायती फॉर्म भरकर वापस आने के लिए कहा। कुछ देर बाद याचिकाकर्ता के वकील लौटकर आए और कहा कि शिकायत फिर से खारिज कर दी गई है। 

यह जानकर दोनों जजों की बेंच नाराज हो गई और उन्होंने मेटा के वकील से कहा, 'आप हमारे सामने जिद्दी मत बनिये। हम जो बोल रहे हैं उसका पालन करें। आप समझ नहीं पा रहे हैं कि हम क्या कह रहे हैं। हम आपके प्रति उदारता दिखा रहे हैं। हम आपको आपका घर व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त समय दे चुके हैं। भले ही आपके पास अरबों यूजर्स हो सकते हैं, लेकिन आपका घर व्यवस्थित नहीं है।'

कोर्ट ने कहा, आपका सिस्टम काम नहीं कर रहा है, ऐसे में हम आपको फटकार लगाते हुए आदेश पारित करेंगे.... इसलिए ऐसा ना करें.. कृपया बात को समझें, अगर सिस्टम काम नहीं करेगा तो नियम बेकार हो जाएंगे। 

इसके बाद दोनों जजों की पीठ ने मेटा के वकील से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मीडिया हाउस की शिकायत को सुना जाए और उस पर उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही कहा कि अगली सुनवाई पर ज्यादा बेहतर जवाब के साथ आने के लिए कहते हुए बुधवार तक के लिए सुनवाई को स्थगित कर दिया।