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रिज संपत्ति वन अधिकारियों की निजी जागीर नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उचित मंजूरी के बिना रिज क्षेत्र में छह से आठ फीट चौड़ा रास्ता बनाने के लिए अधिकारियों की खिंचाई की। अदालत ने कहा कि रिज क्षेत्र वन विभाग की संपत्ति नहीं है।

रिज संपत्ति वन अधिकारियों की निजी जागीर नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीWed, 29 Nov 2023 09:11 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने उचित मंजूरी के बिना रिज क्षेत्र में छह से आठ फीट चौड़ा रास्ता बनाने के लिए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि रिज वन विभाग की संपत्ति नहीं है, बल्कि नागरिकों की है। ऐसे में अधिकारी केवल नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक हैं। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि वन विभाग केवल राष्ट्रीय राजधानी में वन क्षेत्र का संरक्षक है। इसके साथ ही अदालत ने अधिकारियों से मध्य रिज क्षेत्र में मार्ग के निर्माण से संबंधित पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 

पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने कहा, यह रिज संपत्ति दिल्ली के नागरिकों की है। वन विभाग केवल उसका संरक्षक है, उसका मालिकाना हक नहीं रखता है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने यह टिप्पणी करते हुए वन अधिकारियों से सेंट्रल रिज में मार्ग के निर्माण से संबंधित पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने को कहा। बता दें कि दिल्ली का 'फेफड़ा' माना जाने वाला रिज क्षेत्र अरावली पहाड़ी श्रृंखला का विस्तार है। यह एक चट्टानी, पहाड़ी और जंगली क्षेत्र है। प्रशासनिक कारणों से इसे चार क्षेत्रों-दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर में बांटा गया है। इन चार क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल लगभग 7,784 हेक्टेयर है।

रिज वन विभाग की मालिकाना संपत्ति नहीं
बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, रिज वन विभाग की मालिकाना संपत्ति नहीं है। आप केवल अधिकारों के संरक्षक हैं। मामले में अदालत की सहायता करने वाले न्यायमित्र अधिवक्ता गौतम नारायण, आदित्य एन प्रसाद और प्रभसहाय कौर ने बताया कि सेंट्रल रिज के अंदर इसरो स्टेशन की ओर जाने वाली एक सड़क के अलावा 6 अन्य सड़क भी हैं। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा, जिस रास्ते का इस्तेमाल कुछ संरक्षण गतिविधियों के लिए किया गया था, उसके लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं थी। मामला अब मंजूरी के लिए रिज प्रबंधन बोर्ड को भेजा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हुआ
अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारी का आचरण, पहले मार्ग का निर्माण करना और फिर पहले से मौजूद चीज के लिए मंजूरी की मांग करना प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन था। अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील से यह भी कहा कि वे अगले महीने दक्षिणी रिज में एक अधिसूचित अभयारण्य के अंदर वन विभाग द्वारा "वॉक विद वाइल्डलाइफ" कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में गुरुवार तक निर्देश मांगें। अदालत ने प्रस्तावित वॉकथॉन, साइक्लोथॉन, हाफ मैराथन और जंगल ऑन व्हील्स पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए यह टिप्पणी की।

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