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ट्रूकॉलर के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- कॉलर की जानकारी देना एक सुविधा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मोबाइल एप्लिकेशन ट्रूकॉलर के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए कहा कि नाम, ईमेल और फोन नंबर का प्रावधान करना एक तरह की सुविधा उपलब्ध कराने जैसा है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

ट्रूकॉलर के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- कॉलर की जानकारी देना एक सुविधा
Krishna Singhहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीMon, 12 Feb 2024 05:36 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सोमवार को मोबाइल एप्लिकेशन ट्रूकॉलर के खिलाफ एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह कहा कि किसी व्यक्ति का नाम, ईमेल और फोन नंबर का प्रावधान करना एक तरह की सुविधा मुहैया कराने जैसा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता, वकील अजय शुक्ला की ओर से पेश वकील अंकित सेठी से कहा- पहले तो फोन डाइरेक्ट्री प्रकाशित की जाती थीं। मोबाइल यूजर को अज्ञात नंबर से कॉल करने वाले की पहचान प्रदान करना, एक सुविधा है। 

वकील सेठी ने अपनी दलील में कहा कि ट्रूकॉलर यूजर्स की फोनबुक पढ़ रहा है और उनकी सहमति के बिना लोगों के पते, ईमेल और अन्य विवरणों का खुलासा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रूकॉलर एप्लिकेशन कुछ लोगों के संपर्क नंबरों को स्पैम के रूप में चिह्नित करके प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। वहीं केंद्र ने इस याचिका को प्रचार रिट करार देते हुए अदालत को बताया कि अगस्त 2022 में इसी तरह की मांग वाली उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 

पीठ में न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा भी शामिल थे। वकील की दलील पर उन्होंने कहा कि इस याचिका पर विचार करना पुनः मुकदमेबाजी और प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। यह याचिका पुनः मुकदमेबाजी के समान है। इस रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बारे में कुछ भी खुलासा नहीं किया गया है। अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐप के खिलाफ एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। क्या ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना अदालत का काम है? 

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