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सुनहरी बाग मस्जिद मामले में जनहित याचिका पर विचार करने से हाईकोर्ट का इनकार, क्या वजह?

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कथित यातायात भीड़ के कारण सुनहरी बाग मस्जिद के प्रस्तावित विध्वंस के खिलाफ दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। क्या रही वजह इस रिपोर्ट में जानें...

सुनहरी बाग मस्जिद मामले में जनहित याचिका पर विचार करने से हाईकोर्ट का इनकार, क्या वजह?
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीWed, 21 Feb 2024 09:47 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने इलाके में कथित यातायात भीड़ के कारण सुनहरी बाग मस्जिद के प्रस्तावित विध्वंस (Demolition of Sunehri Bagh Mosque) के खिलाफ एक जनहित याचिका पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि इसी तरह की एक याचिका पहले से ही उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के समक्ष लंबित है, ऐसे में इस पीआईएल पर कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। 

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अपने कानूनी और कार्यकारी कर्तव्यों के निर्वहन में पहले ही उचित उपाय किए जा चुके हैं। इसलिए इस अदालत का मानना ​​है कि वर्तमान याचिका में किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है, इसलिए यह पीआईएल बंद की जाती है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता से तल्ख सवाल भी पूछे। 

अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि जब इस मसले पर एक याचिका पहले से ही सिंगल बेंच के सामने लंबित है, तो एक जैसी मांग को लेकर जनहित याचिका दायर करने का क्या मतलब है। यह पीआईएल वक्फ वेलफेयर फोरम की ओर से दायर की गई थी। इसका केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली वक्फ बोर्ड और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के वकीलों ने कड़ा विरोध किया। 

केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली वक्फ बोर्ड और एनडीएमसी के वकीलों ने कहा कि इस पीआईएल में सुनहरी बाग मस्जिद के इमाम की ओर से सिंगल बेंच के सामने दायर याचिका में कही गई बातों की नकल की गई है। बता दें कि सुनहरी बाग मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज ने सिंगल बेंच के समक्ष एनडीएमसी के 24 दिसंबर के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी गई है। इसमें मस्जिद को हटाने के संबंध में लोगों से आपत्तियां या सुझाव मांगे गए हैं। 

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