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CAA विरोधी प्रदर्शन मामले में शबनम हाशमी को राहत, FIR पर ट्रायल कोर्ट का संज्ञान आदेश दिल्ली HC ने किया रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायत के बजाय मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट  या आरोपपत्र दायर किया, जो कानूनी तौर पर स्वीकार्य नहीं है।

CAA विरोधी प्रदर्शन मामले में शबनम हाशमी को राहत, FIR पर ट्रायल कोर्ट का संज्ञान आदेश दिल्ली HC ने किया रद्द
Praveen Sharmaनई दिल्ली। भाषाSat, 10 Feb 2024 01:25 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करके निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी के खिलाफ एक मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया गया था।

जस्टिस नवीन चावला ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने शिकायत के बजाय मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट  या आरोपपत्र दायर किया, जो कानूनी तौर पर स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने इस सप्ताह की शुरुआत में पारित एक आदेश में कहा, ''आपराधिक वाद संख्या 5612/2021 के संबंध में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा  दिनांक 08.10.2021 को पारित आदेश को रद्द कर दिया गया है।''

अदालत ने कहा कि पुलिस को नई शिकायत दर्ज करने की स्वतंत्रता होगी और उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

याचिकाकर्ता के खिलाफ जून, 2020 में एफआईआर दर्ज की गई थी जब पुलिस को द्वारका सेक्टर-6 के डीडीए पार्क में सीएए के खिलाफ बैनर के साथ घूमते हुए आठ से 10 लोगों का एक वीडियो मिला था।

पुलिस के अनुसार, वीडियो याचिकाकर्ता के 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट किया गया था और याचिकाकर्ता वीडियो में दिखाई दे रहे उस समूह का हिस्सा थी, जो बैनर पकड़े हुए था।

पुलिस के अनुसार, उसका आचरण दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत एक जून, 2020 को एसीपी द्वारका द्वारा जारी निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन था। 

जांच एजेंसी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत अपराध किया है।

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि निचली अदालत आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का संज्ञान केवल संबंधित लोक सेवक या किसी अन्य लोक सेवक की लिखित शिकायत पर ले सकती है।

दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में अदालत ने एक आरोपी को जमानत

वहीं, दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुई संप्रादायिक हिंसा के दौरान दंगा और आगजनी करने के एक आरोपी को शुक्रवार को जमानत देते हुए कहा कि पिछली जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद से परिस्थितियों में बदलाव आ गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रामचला, आरोपी संदीप उर्फ ​​मोगली की चौथी जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। संदीप पर 24 फरवरी, 2020 को भागीरथी विहार में एक संपत्ति में तोड़फोड़ करने और आग लगाने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप है। आरोपी की जमानत अर्जी जुलाई और सितंबर 2023 में, और इस साल दो फरवरी को खारिज कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि एक अभियोजन पक्ष के गवाह की हालिया गवाही के अनुसार, घटना 25 फरवरी, 2020 को हुई।

न्यायाधीश प्रामचला ने कहा, ''अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और अभियोजन पक्ष के कहने पर मामले में तय किए गए आरोपों के बीच घटना के समय में अंतर मेरी राय में मामले से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है।''

अदालत ने कहा कि कथित घटना के समय में अंतर आरोपी के पक्ष में है और यह मामले के अंतिम फैसले के दौरान भी प्रासंगिक होगा। न्यायाधीश ने कहा, ''मुझे लगता है कि परिस्थितियों में इस महत्वपूर्ण बदलाव के आधार पर अर्जीकर्ता (संदीप) जमानत का हकदार है, इसलिए अर्जी मंजूर की जाती है।'' 

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