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दिल्ली में पशु अस्पतालों की दुर्दशा पर अधिकारियों को हाईकोर्ट की फटकार, क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में पशु चिकित्सालयों की खराब और भयावह स्थिति पर हैरानी जताई। अदालत ने कहा कि अधिकारियों में कुछ भी अच्छा करने की मंशा का अभाव है। जानें अदालत ने क्या बातें कही...

दिल्ली में पशु अस्पतालों की दुर्दशा पर अधिकारियों को हाईकोर्ट की फटकार, क्या कहा?
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीMon, 27 May 2024 11:41 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में पशु डेयरियों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई करने में विफल रहने पर अधिकारियों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि अधिकारियों में कुछ भी अच्छा करने की मंशा का अभाव है। आलम यह है कि विशेषज्ञ भी राजनीतिक हितों से निर्देशित हो रहे हैं। अदालत ने बवाना के गोगा डेयरी में एक पशु चिकित्सालय की खराब और भयावह स्थिति पर हैरानी जताई। 

पिछले पांच वर्षों से कोई वहां नहीं गया
अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि पिछले पांच वर्षों से कोई भी वहां नहीं गया। यह इतना सुनसान है कि हर जगह 12 फीट लंबी घास उग रही है। संकीर्ण राजनीतिक हितों के कारण यह दुर्दशा है। यहां तक की विशेषज्ञों की मदद ली जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। इसमें हैरानी नहीं कि कोई भी पुनर्वास डेयरियों में नहीं जाना चाहता है।

जमीनी स्तर पर नहीं है प्रशासन
पीठ ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दिल्ली प्रशासन जमीनी स्तर पर मौजूद है। पीठ ने एमसीडी के वकील और पशुपालन विभाग के अधिकारियों से पूछा कि जहरीले कचरे के बगल में डेयरियों को कैसे संचालित करने की अनुमति दी जा रही है। पीठ ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब पशुपालन विभाग को खत्म करने का समय आ गया है। यह गंदगी में योगदान देने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान कोई कोई नहीं गया
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा- आप कह रहे हैं कि अस्पताल पूरी तरह से काम कर रहा है, लेकिन तस्वीरें बताती हैं कि यह काम नहीं कर रहा है। अस्पताल की हालत बहुत खराब है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कोई भी वहां नहीं गया, यहां तक ​​कि पशु भी नहीं। जमीनी स्तर पर हालात दयनीय हैं। हमें नहीं लगता कि दिल्ली प्रशासन जमीनी स्तर पर मौजूद है।