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एनसीआरदवाओं की कमी पर योजना बनाएं, ऑक्सीजन और सिलेंडर की कीमत तय करे दिल्ली सरकार : हाईकोर्ट

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाताPublished By: Dinesh Rathour
Mon, 10 May 2021 10:28 PM
दवाओं की कमी पर योजना बनाएं, ऑक्सीजन और सिलेंडर की कीमत तय करे दिल्ली सरकार : हाईकोर्ट

उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार को आक्सीजन और इसके सिलेंडर की कीमत तय करने के साथ-साथ भविष्य में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में काम आने वाली दवाओं की कमी नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाने को कहा है। न्यायालय ने इस मामले में नियुक्त न्याय मित्र की रिपोर्ट पर विचार करते हुए सरकार को यह निर्देश दिया है।

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) द्वारा ऑक्सीजन और उसके सिलेंडर की निर्धारित मूल्य का पालन सख्ती से पालन किया जाए। इसके बाद दिल्ली सरकार ने न्यायालय को भरोसा दिया कि यह इस मुद्दे पर सभी हित धारकों के साथ बैठक करके सुमचित निर्णय लेगी।

उच्च न्यायालय ने सरकार को ऑक्सीजन और उसके सिलेंडर की कीमत तय करते समय उसके परिवहन लागत को भी ध्यान में रखने को कहा है। पीठ ने सरकार से कहा है कि निर्णय लेते वक्त इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि मूल्य तय करने से इसके आपूर्ति प्रभावित नहीं हो। इसके साथ ही न्यायालय ने दिल्ली सरकार को मामले की अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

एम्बुलेंस की दरें वेबसाइट पर डाले सरकार
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को एम्बुलेंस और शव वाहन मुहैया कराने वाले सेवा प्रदाताओं की सूची और दरें अपने वेबासाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। पीठ ने न्याय मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव की रिपोर्ट पर दिया है। उन्होंने पीठ के समक्ष एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने वाले सेवा प्रदाताओं और उनकी दरों की सूची पेश की। राव ने बताया कि इसके बारे में उन्होंने खुद सत्यापन भी किया है। राव ने पीठ को यह बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर एम्बुलेंस, आक्सीजन आपूर्ति करने वाले वाहनों को डीजल/पेट्रोल देने से इनकार किया जा रहा है। इस बारे में न्यायालय ने सरकार को पेट्रोल पंपों को इस बारे में संवेदनशील बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कहा कि कोई पेट्रोल पंन इन वाहनों को इंधन देने से इनकार नहीं कर सकते।

दवाओं की कमी पर योजना बनाए सरकार
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को कोरोना संक्रमण के इलाज में काम आने वाली दवाओं और अन्य जरूरी समान की कमी भविष्य में नहीं हो, इसके लिए योजना तैयार करने को कहा है। इससे पहल न्याय मित्र ने पीठ को बताया कि अब तक कोर्ट और सरकारें ऑक्सीजन की तरह कमी को दूर करने के लिए काम कर रही थी, जबकि इसके लिए पहले से योजना बनाने की जरूरत थी।

लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए इहबास का हो सकता है इस्तेमाल
उच्च न्यायालय ने कोरोना महामारी के दौरान लोगों को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को जरूरी बताया। पीठ ने कहा कि लोग संक्रमण के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के अलावा ऑक्सीजन, बेड और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं, इससे मरीजों के साथ-साथ परिजनों को भी मानसिक तनाव हो रहा है। पीठ ने दिल्ली सरकार से यह बताने के लिए कहा है कि ‘क्या मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किया जा सकता है या नहीं। पीठ ने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण को भी अपने जिलेवार काउंसलरों की सूची को पेश करने को कहा है जो लोगों को टेली-काउंसलिंग में मदद कर सकते हैं।

1021 हेल्पाइन में 200 लाइने बढ़ाई गई
दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि उसने हेल्पलाइन 1031 की 200 लाइने बढ़ा दी है। इस हेल्पलाइन पर लोगों को काउंसलिंग दी जाती है। उच्च न्यायालय में निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों को कैशलैश इलाज नहीं दिए जाने के मामले में भी संज्ञान लिया। न्यायालय ने इस मसले पर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। न्याय मित्र राजशेखर राव ने पीठ को बताया कि निजी अस्पताल मरीजों को कैशलैस इलाज नहीं दे रहे हैं या भर्ती से ही इनकार कर दे रहे हैं।

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