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दिल्ली में न्यूनतम वेतन पर नियम की मांग; 60 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा, HC ने मांगा जवाब

दिल्ली में न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 31ए को लागू करने के लिए जरूरी नियम बनाने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र और केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी किया है।

दिल्ली में न्यूनतम वेतन पर नियम की मांग; 60 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा, HC ने मांगा जवाब
Krishna Singhएएनआई,नई दिल्लीTue, 28 Nov 2023 03:03 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में न्यूनतम वेतन (दिल्ली) संशोधन अधिनियम 2017 द्वारा सम्मिलित न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 31ए को लागू करने के लिए आवश्यक नियम बनाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। न्यूनतम वेतन (दिल्ली) संशोधन अधिनियम 2017 राष्ट्रीय राजधानी में हर नियोक्ता को कर्मचारियों का डेटा वेबसाइट या वेब पोर्टल पर अपलोड करने के लिए बाध्य करता है। याचिका को दिल्ली में काम करने वाले कर्मचारियों के हित में की गई बड़ी पहल माना जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि इससे दिल्ली में 20 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले 60 लाख से अधिक कर्मचारियों को फायदा होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा भी शामिल थीं, जिन्होंने इस मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, साथ ही भारत सरकार को भी पक्षकार बनाया और मामले में उससे भी जवाब तलब किया। 

सोशल ज्यूरिस्ट (एक नागरिक अधिकार समूह) की अध्यक्ष कुसुम शर्मा के माध्यम से याचिका डाली गई है।इसमें न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की धारा 31ए के मूल उद्देश्य और उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला, जैसा कि न्यूनतम वेतन (दिल्ली) संशोधन अधिनियम, 2017 द्वारा डाला गया है। याचिका में कहा गया है कि न्यूनतम वेतन (दिल्ली) संशोधन अधिनियम, 2017 श्रमिकों को शोषण से बचाने के लिए है, जो कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 31ए को लागू करने में देरी या नियम नहीं बनाने से विफल हो गया है।

याचिका में कहा गया है कि न्यूनतम वेतन (दिल्ली) संशोधन अधिनियम 2017 को 23 अप्रैल 2018 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इसे 4 मई 2018 में दिल्ली राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में लागू न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की धारा 31ए के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक नियम बनाए जाने की आवश्यकता है, जो अब तक नहीं बनाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी सरकारों के पास न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 31ए को लागू करने में देरी या आवश्यक नियम नहीं बनाने का कोई कारण नहीं है।

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